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Showing posts from November, 2024

दिल सिर्फ दिल से

दोस्त दिल के दरवाजे से आते हैं, मोहब्बत की रौशनी जगाते हैं। दौलत से खरीदे जहां के सभी साजो-सामान, मगर दिल की दौलत से ही, दिलों के दर खुलते हैं। दिल की चौखट पर जब दोस्त आते हैं,  मोहब्बत के दीप वहां जलाते हैं। हर कोना रौशन हो उठता है फिर, जब मुस्कान से जज़्बात सजाते हैं। सोने-चांदी से सजे हैं कई मकान, पर उनमें नहीं वो अपनापन का गान। जो दिल से मिले, वो दिल में बस जाए, वो दौलत नहीं, जो हर दिल को भाए। सजाएं महल या खरीदें ज़मीन, बिन सच्चे जज़्बे, सब बातें अधीन। दिल की दौलत हो, तो रिश्ते भी खिलते हैं, वरना ताले तो दरवाज़ों पर भी मिलते हैं।

तुझे क्या खबर

  तुझे क्या खबर… तुझे क्या खबर, तुझको मैं कितना अपनी रूह में बसाए रखता हूँ। जज्बातों को लफ्ज़ों में ढालूं कैसे, हर अल्फाज़ में तुझी को तलाशता हूँ… तुझे क्या खबर, तुझको मैं कितना... अगर पढ़ सके तो पढ़ के देख, मौन रहकर भी हर पल, तेरी धड़कनों से बात करता हूँ… तुझे क्या खबर, तुझको मैं कितना... हर लम्हा कटता है तेरी यादों में घुलकर, तू अहसास है, जो सांसों में महकता हूँ… तू ही नूर, तू ही सुकून मेरा, हर धड़कन में तेरा नाम लिखता हूँ… तुझे क्या खबर, तुझको मैं कितना…