दोस्त दिल के दरवाजे से आते हैं, मोहब्बत की रौशनी जगाते हैं। दौलत से खरीदे जहां के सभी साजो-सामान, मगर दिल की दौलत से ही, दिलों के दर खुलते हैं। दिल की चौखट पर जब दोस्त आते हैं, मोहब्बत के दीप वहां जलाते हैं। हर कोना रौशन हो उठता है फिर, जब मुस्कान से जज़्बात सजाते हैं। सोने-चांदी से सजे हैं कई मकान, पर उनमें नहीं वो अपनापन का गान। जो दिल से मिले, वो दिल में बस जाए, वो दौलत नहीं, जो हर दिल को भाए। सजाएं महल या खरीदें ज़मीन, बिन सच्चे जज़्बे, सब बातें अधीन। दिल की दौलत हो, तो रिश्ते भी खिलते हैं, वरना ताले तो दरवाज़ों पर भी मिलते हैं।
कुछ अल्फ़ाज़ कागज़ पर उतरते हैं, कुछ रिश्तों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। 👇 नीचे स्क्रॉल करें—हर पोस्ट एक नई कहानी, एक नई अनुभूति लेकर आपका इंतज़ार कर रही है। गीत • भजन • ग़ज़ल • कविताएँ • कहानियाँ