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About the Author

🙏Welcome!

I am not a professional poet or writer. I am simply someone who has always believed in expressing emotions through words.

Long before mobile phones, emails, and social media became a part of our lives, I found joy in writing letters, greetings, and messages to my family and friends. Many of those heartfelt expressions naturally took the form of poems. They were never written to become literature, they were written to celebrate relationships, share emotions, and preserve special moments.

Over the years, those handwritten pages became treasured memories. Kagaz Ke Patte | Flowers of Relationships is my humble effort to preserve and share that collection with my family and with anyone who appreciates the beauty of genuine emotions and human connections.

This blog brings together poems, memoirs, reflections, and life experiences centered around family, relationships, childhood memories, festivals, and the values that connect us. Some writings are deeply personal, while others carry messages that I hope resonate with a wider audience.

I believe that words have a unique power, not to impress, but to connect hearts, preserve memories, and keep relationships alive across generations.

If any of my writings remind you of your own family, childhood, or cherished moments, then this blog has fulfilled its purpose.

Thank you for visiting.

Umakant Vashisth

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खींची मैंने रेखा पे रेखा

 पूजा बत्ती करली मैंने  मंदिर भोग लगा आया, लोगों को मन्तर आता नहीं मैंने तो मन्तर भी गाया  कर दान रुपे दो मंदिर में, मैं दानवीर भी कहलाया। दोष दिखें  औरों में मुझको , मेरी तो निर्दोषी काया ,  नही क्रोध मुझ में थोड़ा भी , पर औरों पे गुस्सा आया , अहम नही मुझ में बोलो मैंने तो मैं को ही पाया ज्ञान बहुत मुझ में मगर औरो में भूसा देखा अहम के जंजाल में फंस, खींची मैंने रेखा पे रेखा

सवाल और जवाब

ज़िंदगी में सवाल भी देखे, और जवाब भी देखे।  ऐ मशक्कत भरी ज़िंदगी, जवाबों की जगह,  इल्ज़ामों के हमले हज़ार देखे।  सुना था ज़िंदगी कभी, नासूर बन जाती है,  हक़ीक़त में, बदलते सवाल और जवाब भी देखे।  अब तो हर सवाल पर मुस्कुरा देते हैं,  क्योंकि बदलते वक़्त के साथ जवाब बदलते देखे।

अब ससुराल संवारना

विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों, दो संस्कृतियों और दो हृदयों के स्नेहपूर्ण मिलन का उत्सव है। कन्यादान के पावन क्षण में माता-पिता के मन में उमड़ती भावनाओं को शब्द देना आसान नहीं होता। "ओ समधी जी... ओ समधन जी..." उसी भावभूमि से जन्मी एक मौलिक रचना है, जिसमें बेटी के प्रति असीम स्नेह, उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना और समधी-समधन से उसे प्रेमपूर्वक अपनाने का विनम्र अनुरोध व्यक्त किया गया है। यह गीत केवल एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि विश्वास, अपनत्व और रिश्तों की गरिमा का भावपूर्ण संदेश है। आशा है कि इसकी पंक्तियाँ आपको भी उन अनमोल क्षणों से जोड़ देंगी, जहाँ विदाई के आँसू और नए जीवन की मुस्कान एक साथ खिल उठते हैं। प्रस्तुत हैं इस भावपूर्ण विवाह गीत के सम्पूर्ण बोल दोहा :  बिटिया सुख की छाँव है, बिटिया जीवन प्राण आज समर्पण कर रहे,  करके कन्यादान गीत ओ समधी जी......ओ समधन जी ..... हम पर इक,         उपकार करो । बड़ा कठिन है, ये क्षण जीवन का ,  दिल से दिल का,         दान करो ।। बिटिया हमारी लाडली , सबके आँखो...

तुझ में राम मुझ में राम - एक भावपूर्ण राम भजन | आत्मा में बसे श्रीराम I Tujh Mein Ram Mujh Mein Ram – Hindi Ram Bhajan | Spiritual Hindi Poem

🌿 इस राम भजन के बारे में "तुझ में राम, मुझ में राम" केवल एक भजन नहीं, बल्कि भारतीय अध्यात्म की उस भावना का सरल और मधुर स्वरूप है जो कहता है कि ईश्वर हर जीव में विद्यमान हैं। यह रचना हमें याद दिलाती है कि जब हम अपने भीतर और दूसरों में श्रीराम के दिव्य स्वरूप को पहचानते हैं, तब भेदभाव समाप्त हो जाता है और प्रेम, करुणा, विश्वास तथा अपनापन जीवन का आधार बन जाते हैं। "राम-राम" केवल अभिवादन नहीं, बल्कि दो आत्माओं के मिलन का आध्यात्मिक संदेश बन जाता है। सरल शब्दों और सहज भावों में लिखा गया यह भजन भक्ति, मानवता और आत्मिक एकता का संदेश देता है। यदि यह रचना आपके हृदय को स्पर्श करे तो इसे अपने परिवार और मित्रों के साथ अवश्य साझा करें, ताकि श्रीराम का यह प्रेम-संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच सके। तुझ में राम मुझ में राम हम मिले तो बने राम राम मन की धड़कन, श्वास में राम, हर इक क्षण का विश्वास है राम। तेरी मुस्कान में झलके जो, वही मेरा उल्लास है राम। तेरे संग जो राह चलूँ, हर पथ हो जाता धाम। दूरी का फिर अर्थ कहाँ, जब संग-संग हों श्रीराम। नेत्र बंद कर जब सोचूँ, भीतर गूंजे एक ही न...

छोटी सी गुड़िया

छोटी सी गुड़िया कब बड़ी हो गई कल ही तो गोद में थी, हंसती गाती फूलों सी कोमल कली, आज निडर हो गई। छोटी सी गुड़िया कब बड़ी हो गई। पलक झपकते ही, ऋतुएँ कितनी बदल गई। कल की नन्ही नन्ही बातें, आज कहानी हो गई। छोटी सी गुड़िया कब बड़ी हो गई। मेरे सपनों की परी, आज आसमान छूने को है। नन्हा सा पंछी अब, उड़ान भरने को है। अभी तो सुबह थी, कब सांझ हो गई। छोटी सी गुड़िया कब बड़ी हो गई। याद है वह दिन, नन्हे हाथों से मेरी उंगली थामी थी। दो कदम क्या चली, सुंदर सी चप्पल खरीदी थी। आज मेरी आरज़ू, उसकी हो गई। छोटी सी गुड़िया कब बड़ी हो गई। — उमाकान्त

मौन की भाषा

खोज में निकला था, बाहर उमाकान्त, शब्दों में सच था, पर मन था शान्त। तर्कों के साए में भटका बहुत, पर सत्य न पाया, रहा बस विभ्रांत। बुद्ध ने कहा, “दीपक स्वयं बनो,” विवेकानंद बोले, “खुद को पहचानो।” कृष्णमूर्ति की वाणी गूंजे कहीं, “जो ज्ञात है, बस भ्रम है यहीं।” सत्य न ग्रंथों में, न शास्त्रों की रीत, न वाद-विवाद, न तर्कों की जीत। यह तो बस मौन की भाषा में बसता, हृदय की गहराइयों में ही हंसता। जो भीतर उतरे, वही जान पाए, जो खुद को समझे, वही सत्य पाए। खोलो यह पर्दा, हटाओ यह धुंध, सत्य वहीं है, जहां हो अनुगंध। उमाकान्त

राम नाम की चिंगारी | भाव की हवा बस लगने दो |Ram Raam Bhajan

 यह भजन एक सरल किन्तु गहन आध्यात्मिक सत्य को व्यक्त करता है । राम नाम को प्रज्वलित करने के लिए किसी चमत्कार की नहीं, केवल प्रेम, श्रद्धा और भाव की आवश्यकता है। राम नाम हर हृदय में चिंगारी की तरह विद्यमान है। जब उस पर भक्ति की हवा चलती है, तो वही छोटी-सी चिंगारी जीवन को आलोकित करने वाली ज्योति बन जाती है। यह गीत बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि भीतर की भक्ति, सेवा और समर्पण का निमंत्रण है।  Raam Naam ki Chingari Bhajan Lyrics मुखड़ा राम नाम की चिंगारी है, भाव की हवा बस लगने दो।  राम नाम की ज्योत जलेगी, मन का तम सब मिटने दो॥ राम-राम का नाम जो गूँजे, प्रेम का दीपक जलने दो।  राम नाम की चिंगारी है, भाव की हवा बस लगने दो॥ अंतरा १ मन की लकड़ी सूखी पड़ी है, प्रेम की अग्नि जलने दो।  श्रद्धा की इक छोटी चिनगारी, जीवन-ज्योति बनने दो॥ अंतर में जब राम बसेंगे, द्वेष सभी अब ढलने दो।  राम नाम की चिंगारी है, भाव की हवा बस लगने दो॥ अंतरा २ शबरी जैसा सरल हृदय हो, प्रेम के बेर सजने दो।  केवट जैसी सेवा लेकर, चरणों में मन लगने दो॥ राम नहीं वैभव के भूखे, प्रेम की गंगा बहने दो।  र...

"क्या याद है आपको | बड़े भाई को एक पत्र

 बड़े भाई को एक पत्र | "क्या याद है आपको?" बचपन की यादों को फिर से जीने का एक आत्मीय प्रयास... यह कोई काल्पनिक कविता नहीं, बल्कि मेरे बड़े भाई के नाम लिखा गया एक आत्मीय पत्र है। समय के साथ जीवन बदलता गया, जिम्मेदारियाँ बढ़ती गईं, लेकिन गाँव की गलियाँ, बचपन के खेल, खेत-खलिहान, मेले, परिवार का स्नेह और साथ बिताए वे अनमोल पल आज भी स्मृतियों में वैसे ही बसे हुए हैं। यह पत्र उन्हीं यादों को फिर से जीने, उन्हें शब्दों में संजोने और बड़े भाई के साथ साझा करने का एक छोटा-सा प्रयास है। क्या याद है आपको! गाँव की गलियों में पेड़ की डालियों पे, वो गुलाक कांकड़ी खेली जाती। वो छुपा-छुपी, वो किलकिल काँटे, और मृदुल-मृदुल थे कई साथी। क्या याद है आपको! सुबह-सुबह वो स्कूल जाना, बैग में चटनी-रोटी खाना। मन नहीं होता पढ़ने में, तो पेट दर्द का वो बहाना। क्या याद है आपको! छुट्टी के दिन खेतों पे जाना, मज़दूरों के संग खेत नड़ाना। और दोपहर को मेला का हेला, आँक के पत्तों में राबड़ी का बेला। क्या याद है आपको! बाजरा जब कट जाता था, खलिहान में पहुँच जाता था। कड़ब से बनती सुंदर कुटिया, एक गधूली, एक रजाई और पा...

साँसों का कर्ज़ | दर्द, इंसानियत और रिश्तों की संवेदना पर एक भावपूर्ण हिंदी कविता

  साँसों का कर्ज़  दर्द, इंसानियत और रिश्तों की संवेदना पर एक भावपूर्ण हिंदी कविता दर्द किसी का भी हो , दर्द कभी पराया नहीं होता। एक कराह उठे जहाँ कहीं , वहाँ आसमान भी चुप नहीं होता। साँसें तो सबके सीने में , चुपचाप सफ़र करती हैं। पर कुछ साँसें ऐसी होती हैं , जो दूसरों के लिए भी जीती हैं। होंठों की हमदर्दी से ज़ख्म कहाँ भर पाते हैं ? मरहम तो वही बनते हैं , जो अपने हाथ बढ़ाते हैं। खाली दिखावे की धूप में , रिश्तों की फसल नहीं पकती। नेकी की भीगी मिट्टी पर, इंसानियत अंकुरित होती। घड़ियाली आँसू बहाने से , तक़दीर नहीं सँवरती है। बाज़ू चढ़ाकर चल पड़ो तो , राह भी ख़ुद निखरती है। किसी की बुझती साँसों में यदि उम्मीद की लौ भर दो , अपने हिस्से की धूप समेटो , उसके आँगन में बिखेर दो। दीप वही क्या दीप कहाए , जो बस अपने घर में जले ? सूरज बनना हो तो यारो, हर देहरी पर भोर खिले। जीवन का क्या मोल अगर, बस अपनी धड़कन सुनते रहे। जीना तो तब है, जब रिश्तों की धड़कन बन...

बोलो राम बोलो राम राम राम Lyrics भजन- एक भावपूर्ण राम भजन on high beats - Ram Bhajan

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