यह भजन एक सरल किन्तु गहन आध्यात्मिक सत्य को व्यक्त करता है । राम नाम को प्रज्वलित करने के लिए किसी चमत्कार की नहीं, केवल प्रेम, श्रद्धा और भाव की आवश्यकता है।
राम नाम हर हृदय में चिंगारी की तरह विद्यमान है। जब उस पर भक्ति की हवा चलती है, तो वही छोटी-सी चिंगारी जीवन को आलोकित करने वाली ज्योति बन जाती है। यह गीत बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि भीतर की भक्ति, सेवा और समर्पण का निमंत्रण है।
Raam Naam ki Chingari Bhajan Lyrics
मुखड़ा
राम नाम की चिंगारी है, भाव की हवा बस लगने दो।
राम नाम की ज्योत जलेगी, मन का तम सब मिटने दो॥
राम-राम का नाम जो गूँजे, प्रेम का दीपक जलने दो।
राम नाम की चिंगारी है, भाव की हवा बस लगने दो॥
अंतरा १
मन की लकड़ी सूखी पड़ी है, प्रेम की अग्नि जलने दो।
श्रद्धा की इक छोटी चिनगारी, जीवन-ज्योति बनने दो॥
अंतर में जब राम बसेंगे, द्वेष सभी अब ढलने दो।
राम नाम की चिंगारी है, भाव की हवा बस लगने दो॥
अंतरा २
शबरी जैसा सरल हृदय हो, प्रेम के बेर सजने दो।
केवट जैसी सेवा लेकर, चरणों में मन लगने दो॥
राम नहीं वैभव के भूखे, प्रेम की गंगा बहने दो।
राम नाम की चिंगारी है, भाव की हवा बस लगने दो॥
अंतरा ३
पत्थर तक जो पार लगा दे, ऐसा नाम सँभलने दो।
एक "राम" हृदय से निकले, भाग्य के लेख बदलने दो॥
अहंकार की रात ढले अब, भक्ति का सूरज उगने दो।
राम नाम की चिंगारी है, भाव की हवा बस लगने दो॥
अंतरा ४
रोम-रोम में राम समाएँ, ऐसा रंग चढ़ने दो।
श्वास-श्वास में नाम बहे अब, प्रेम सुधा को झरने दो॥
जीवन का हर पल प्रभु को, सेवा में ही ढलने दो।
राम नाम की चिंगारी है, भाव की हवा बस लगने दो॥
समापन
राम नाम की चिंगारी है, भाव की हवा बस लगने दो।
एक चिंगारी राम-नाम की, जग का तम सब मिटने दो॥
बोलो सियावर रामचन्द्र की जय! पवनसुत हनुमान की जय!
राम नाम की चिंगारी है,
प्रेम की हवा बस लगने दो।
राम नाम की ज्योत जलेगी,
मन का तम सब मिटने दो॥

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