52 बरस – मैं भी और तुम भी | विवाह, प्रेम और जीवन यात्रा पर हिंदी कविता; A husband to wife a love letter
Visit: Kagaj Ke Patte – https://kagajkepatte.blogspot.com/ 🌸 बावन बरस,मैं भी और तुम भी! 🌸 कुछ कविताएँ कल्पना से जन्म लेती हैं, और कुछ जीवन स्वयं लिखता है। यह कविता उन्हीं अनगिनत पलों का संकलन है, जो दो लोगों ने साथ जीए संघर्ष, सपने, प्रेम, परिवार, बिछड़ाव, विश्वास और ईश्वर के आशीर्वाद के साथ। 52 बरस – मैं भी और तुम भी" केवल एक वैवाहिक जीवन की कहानी नहीं, बल्कि उस सफ़र का उत्सव है जहाँ दो लोग धीरे-धीरे एक-दूसरे का संसार बन जाते हैं। आज हम बावन के हो गए , मैं भी , तुम भी ! पाँच दशक और दो बरस , मैं भी , तुम भी ! छब्बीस बरस 2000 से पहले , छब्बीस बरस 2000 के बाद , पलकों में जैसे सिमट गए , मैं भी , तुम भी। गाँव की पगडंडी से निकले , कस्बों की गलियों से गुजरे , शहरों की धड़कन तक पहुँचे , फिर राजधानी के सपने सँवरे । शहर बदलते रहे , नए रिश्ते बनते रहे , मंजिलें चाहे जितनी बदली , संग तेरे अरमान नए बुनते रहे। आज हम बावन के हो गए , मैं भी , तुम...