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बावन बरस, मैं भी और तुम भी!

 🌸 बावन बरस,मैं भी और तुम भी! 🌸

01

आज हम बावन के हो गएमैं भी, तुम भी!

पाँच दशक और दो बरस, मैं भी, तुम भी!

छब्बीस बरस 2000 से पहले, छब्बीस बरस 2000 के बाद,

पलकों में जैसे सिमट गए, मैं भी, तुम भी।

- 02 

गाँव की पगडंडी से निकले, कस्बों की गलियों से गुजरे,

शहरों की धड़कन तक पहुँचे, फिर राजधानी के सपने सँवरे

शहर बदलते रहे,      नए रिश्ते बनते रहे,

मंजिलें चाहे जितनी बदली, संग तेरे अरमान नए बुनते रहे।

आज हम बावन के हो गए, मैं भी, तुम भी!---

- 03

आज से ठीक छब्बीस बरस पहले, हम दोनों भी छब्बीस के,

नए सहस्त्राब्दी की देहरी पर, तेरी आँखों में देखे थे सपने सुनहरे सफ़र के।

रिश्तों को जोड़ना, निभाना, हर मन से मन का सेतु बनाना,

तुमने घर को घर बना दिया, प्रेम का तीरथ, मन्दिर बना दिया।

 आज हम बावन के हो गए, मैं भी, तुम भी!---

-04

माँ की कमी बचपन से थी, मन में एक रिक्तता पली थी,

बहुत स्नेह मिला अपनों से, पर ममता कहीं अधूरी थी।

तुम आई तो वह शून्य भरा, मन का सूना आँगन हरा,

पत्नी ही नहीं, माँ का स्पर्श बन, पुनर्जनम जैसे फिर से धरा।

आज हम बावन के हो गए, मैं भी, तुम भी!---

-05

तुम्हारी भक्ति, तुम्हारी वाणी, हर दिन एक मधुर कहानी,

लड्डूगोपाल आए, भजन सजाए, मन मंदिर में, दीप जलाए।

 जब तुमने सुरों को, होंठों पर सजाया, सूना सा मौसम भी, संग गुनगुनाया।

तेरी मीठी आवाज़ की, छाँव में जैसे, हर थका हुआ पल, सुकून बन आया।

आज हम बावन के हो गए, मैं भी, तुम भी!---

- 06

चीनू आई, नई खुशियाँ लाई, मीनू आई, साथ वृद्धि लाई,

आयु आया, भाग्य जगाया, घर आँगन में उजियारा छाया।

तुम आई तो घर में हरियाली, तुम आई तो किस्मत मतवाली,

छोटे सपने बड़े हुए फिर, हाथ में आई रंगों की थाली।

आज हम बावन के हो गए, मैं भी, तुम भी!---

-07

मैं थोड़ा गुस्सैल, थोड़ा सुस्त, छोटी बातों में, हो जाता व्यस्त,

तुमने हर बिखरी डोर संभाली, हर उलझन को हँसकर टाली।

घर की बातें या दफ्तर के प्रश्न, तुम्हारे उत्तर जैसे दर्पण में जश्न,

जब भी मन में, डर ने डेरा डाला, तुमने साहस का, दीप जला डाला।

आज हम बावन के हो गए, मैं भी, तुम भी!---

-08

रास्ता चाहे सीधा हो,

टेढा-मेढा  या हो, कठिन,

रुकना नहीं, झुकना नहीं

समझा पढ़ के तेरा, निर्मल मन।

आज हम बावन के हो गए, मैं भी, तुम भी!---

- 09

एक पल भी, तेरे बिना

जीवन की कल्पना नहीं,

तू साथ है तो साँस है

तू नहीं तो कुछ भी नहीं।

आज हम बावन के हो गए, मैं भी, तुम भी!---

- 10

लगता है कोई पुराना बंधन था, कई जन्मों काजैसे अनुबंध था,

ना मैं जयपुर आता, ना तू जयपुर में होती, मानो आत्मा से आत्मा का संबंध था

 इस जन्म का जब अंत होगा, फिर कोई नया प्रभात होगा,

मेरा विश्वास अटल यही, अगले जन्म में भी तेरा साथ होगा।

आज हम बावन के हो गए, मैं भी, तुम भी!---

-11

अभी बहुत कुछ, जीना बाकी, बच्चों के संग, मुस्कान बाकी,

भाई बहिनों, परिवार संग, समाज में, रंग जमाना बाकी।।

आज भी लगता है, वही उम्र है, जीवन पच्चीस-छब्बीस का घर है,

थोड़ा बचपना, आज भी बाकी, थोड़ी शरारत, संग तेरे जीवन भर है।।

आज हम बावन के हो गए, मैं भी, तुम भी!---

- 12

तेरी मुस्कान, जब सामने आती,  हर चिंता, खुद ही सो जाती,

तेरी हँसी की, एक किरण,  जीवन का उत्सव, बन जाती।

कैसे रोकूँ, यादों की कलम को, लिख दूँ हर अनमोल, क्षणों को,

बाऊजी की सेवा, परिवार से प्रेम, बांध लूँहर यादों के धागों को।

आज हम बावन के हो गए, मैं भी, तुम भी!---

 -13 

तुम पत्नी ही नहीं, मेरी मित्र, मेरी शक्ति, मेरी प्रेरणा हो,

मेरी भक्ति, मेरी श्रद्धा, मेरा संगीत, मेरी मंज़िल हो।

ईश्वर का सबसे सुंदर आशीर्वाद,

और मेरे जीवन का सबसे अनमोल प्रसाद हो।

आज हम बावन के हो गए, मैं भी, तुम भी!---

 

🎂 जन्मदिन मुबारक हो, गरिमा! 🎂

 


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