भावनाओं के भंवर में, जब फँसा हो कोई, 'और' मौसम भी बेअसर होता है । सूझता नही, कुछ भी बस, नये शब्दों से सरोकार उसका होता है I दो लाईन गर लिख भी दी कुछ और नहीं, कविता का रूप ही होता है I
कुछ अल्फ़ाज़ कागज़ पर उतरते हैं, कुछ रिश्तों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। 👇 नीचे स्क्रॉल करें—हर पोस्ट एक नई कहानी, एक नई अनुभूति लेकर आपका इंतज़ार कर रही है। गीत • भजन • ग़ज़ल • कविताएँ • कहानियाँ