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Showing posts from August, 2026

अरमान बहुत हैं मेरे

अरमान बहुत हैं मेरे The poem reflects the aspirations of a soul seeking purpose beyond personal success. It is about transforming life's experiences into wisdom, fulfilling responsibilities, and inspiring others through compassion, service, and hope. अरमान बहुत हैं मेरे, धरातल पे कैसे लाऊँ। जो सपने देखे हैं मैंने, कैसे  उन्हें  सजाऊँ॥ सपनों की ऊँची उड़ानों को, सच की ज़मीं पर लाना है। जो पाया जीवन की राहों में, जन-जन तक पहुँचाना है अहसासों में बसी आहों को, कैसे पार लगाऊँ। अरमान बहुत हैं मेरे, धरातल पे कैसे लाऊँ। ज़िंदगी बहुत छोटी है, करने को कितना बाकी है। हर चेहरे की अपनी पीड़ा, हर आँख में इक झाँकी है। दर्द जग में इतना फैला, किस-किस को पार लगाऊँ। जो सपने देखे हैं मैंने, कैसे उन्हें  सजाऊँ॥ एक तरफ़ है मेरा दफ़्तर, दूजी तरफ़ संसार खड़ा। जाने कितनी आशाओं का, मुझसे हर विश्वास जुड़ा। कुछ ऐसा करके जाना है, जो सबके काम भी आऊँ। अरमान बहुत हैं मेरे, धरातल पे कैसे लाऊँ। कुछ सपने हैं गीतों में मेरे, कुछ कविता की मुस्कान बने। कुछ रेखाओं में भाग्य पढ़ूँ, कुछ जीवन की पहचान बने। ...

राशियाँ और उनके तत्व | जीवन का सार [ Zodiac and their elements - The Essence of Life ]

Rashi Aur Unke Tatva – Jeevan Saar In Vedic Astrology, the twelve zodiac signs are grouped into four fundamental elements— Agni (Fire), Dhara/Prithvi (Earth), Vayu (Air), and Jal (Water) . These elements represent not only the nature of each zodiac sign but also the qualities that shape our thoughts, actions, emotions, and personality. This poem presents the essence of these four elements through simple Hindi verses, while offering timeless lessons for everyday life. राशियाँ और उनके तत्व | जीवन का सार दोहा पंचतत्व से जग बना, सृष्टि हुई साकार। चार तत्व में बँटी हुई, राशियों का संसार॥ चौपाई अग्नि, पृथ्वी, वायु, जल, चार तत्व प्रधान। इनसे राशि प्रकट करे, अपना रूप विधान॥ तत्व बतावें किस तरह, होगा उसका ढंग। सोच, स्वभाव, कर्म और, जीवन का हर रंग॥ दोहा मेष, सिंह, धनु अग्नि के, तेज भरे हर श्वास। साहस, सेवा, सत्य से,  बढ़ता इनका प्रकाश ॥ चौपाई दीपक बनकर राह दिखाए, यही अग्नि का धर्म। क्रोध बने यदि अनियंत्रित, जला दे सारे कर्म॥ हिम्मत रखना...

"क्या याद है आपको | बड़े भाई को एक पत्र

 बड़े भाई को एक पत्र | "क्या याद है आपको?" बचपन की यादों को फिर से जीने का एक आत्मीय प्रयास... यह कोई काल्पनिक कविता नहीं, बल्कि मेरे बड़े भाई के नाम लिखा गया एक आत्मीय पत्र है। समय के साथ जीवन बदलता गया, जिम्मेदारियाँ बढ़ती गईं, लेकिन गाँव की गलियाँ, बचपन के खेल, खेत-खलिहान, मेले, परिवार का स्नेह और साथ बिताए वे अनमोल पल आज भी स्मृतियों में वैसे ही बसे हुए हैं। यह पत्र उन्हीं यादों को फिर से जीने, उन्हें शब्दों में संजोने और बड़े भाई के साथ साझा करने का एक छोटा-सा प्रयास है। क्या याद है आपको! गाँव की गलियों में पेड़ की डालियों पे, वो गुलाक कांकड़ी खेली जाती। वो छुपा-छुपी, वो किलकिल काँटे, और मृदुल-मृदुल थे कई साथी। क्या याद है आपको! सुबह-सुबह वो स्कूल जाना, बैग में चटनी-रोटी खाना। मन नहीं होता पढ़ने में, तो पेट दर्द का वो बहाना। क्या याद है आपको! छुट्टी के दिन खेतों पे जाना, मज़दूरों के संग खेत नड़ाना। और दोपहर को मेला का हेला, आँक के पत्तों में राबड़ी का बेला। क्या याद है आपको! बाजरा जब कट जाता था, खलिहान में पहुँच जाता था। कड़ब से बनती सुंदर कुटिया, एक गधूली, एक रजाई और पा...