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दसवीं कक्षा

 कक्षा दस है मोड़ ज़िंदगी का, शुरुआत यहाँ से उड़ान की, मेहनत का रस पी जो ले, खुल जाएं राहें सम्मान की। ग्यारह–बारह बस दो कदम हैं, जो तय करें भविष्य की राह, पढ़ना समझना गहराई से, यही सफलता का है गवाह। सवालों से मत डर बेटा, हर प्रश्न है एक साथी तेरा, जो हल करेगा धैर्य रख, जीत लेगा संसार सारा। समय को जो देता सम्मान, वो पाता है ऊँचा स्थान, जो ध्यान भटकाए मन का दीप, उसे मिलता संघर्ष का दान। इसलिए अभी से ठान ले दिल में, "हर दिन कुछ बेहतर करना है", ज्ञान की ज्योति जलाकर खुद में, भविष्य अपना गढ़ना है।
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कचरे का भी मुक़द्दर

  कचरे का भी  मुक़द्दर बदल सकता है, टूटी मशीनों में भी  अंकुर पल सकता है। लोहे की नीरस देह में  हरी कली मुस्काई, मृत उपकरण की धड़कन  फिर से गुनगुनाई। जहाँ था कभी सर्किट,  अब हरियाली है, ई–कचरे में जीवन की  नई लाली है। सीखा यह पत्ता,  न कोई चीज़ बेकार, हर अंत में छुपा है  शुरुआत का उपहार। जो फेंका गया कल,  आज जीवन रचता है, हर जंग लगा टुकड़ा भी  उम्मीद बुनता है। आओ हम भी देखें  हर टूटे में नवप्रभात, कुछ नहीं है कचरा बस दृष्टि की बात।

चल अकेला

  आया था बिल्कुल अकेला, ना कोई अपना, ना कोई मेला। फिर अनगिन रिश्तों की डोर जुड़ गई, जीवन की राह संग-संग मुड़ गई। संबंधों ने हर दर्द संभाला, रिश्तों से हर क़दम था निराला। कुछ दोस्त, कुछ रिश्ते टूट गए, बिखरे पत्तों से सपने छूट गए। फिर भी समय हर घड़ी पुकारे, यादों के दीपक मन में सँवारे। दुःख भी उनमें, सुख भी वही, जीवन का सार छुपा है यहीं। राह सुनसान, चल अकेला, साथ मिले,  तो प्रभु का मेला। कर्म किए जा, मत होना ढीला, संग प्रभु के,  कटे हर पीड़ा और झमेला। उमाकान्त

अब ससुराल संवारना

 दोहा :  बिटिया सुख की छाँव है, बिटिया जीवन प्राण आज समर्पण कर रहे,  करके कन्यादान गीत ओ समधी जी......ओ समधन जी ..... हम पर इक,         उपकार करो । बड़ा कठिन है, ये क्षण जीवन का ,  दिल से दिल का,         दान करो ।। बिटिया हमारी लाडली , सबके आँखों की ज्योति है।   हर सुख-दुःख में संग खड़ी,  ममता की महक निराली है।।      घर आँगन की किलकारी, हर दुःख की मुस्कान बनी।    पापा के  साँसों की धड़कन,  माँ के मन की प्रीति बनी।।   ओ समधी जी......ओ समधन जी ..... जब मिल जाये शगुन हो जाये , हर घर में खुशियां भर जाये।   नए काम की शुरुआत में,          स्वयं खड़ी महूरत बन जाये।।    आज सजी है दुल्हन बन के,      नयन नीर से भरे हुए ।   तेरे सपनों का हर उजियारा, अब नए आंगन सँवारे हुए ।।   ओ समधी जी......ओ समधन जी ..... जग की रीत पुरानी है ये,        अब ससुराल सँवारना । हर रिश्ता अपना...

माँ-बाप का जीवन, त्याग की कहानी

 प्रेम का असली अर्थ माँ-बाप का जीवन, त्याग की कहानी, हर सुख-स्वप्न छोड़े, बस बच्चों की रवानी। हर चाहत भूले, अपना सब कुछ खोया, उनके लिए हर दिन, हर सपना संजोया। प्रेम ना है आशा, ना कोई अधिकार, ये बस है देना, निस्वार्थ अपार। आभार और समझ जब रिश्तों में आए, सुख-शांति के दीपक जीवन में जगमगाए। बच्चे समझें हक़, बस लेते ही जाएँ, पर कर्म से रिश्ते की गहराई बढ़ाएँ। ऋण ये नहीं, है ईश्वर का वरदान, सम्मान ही इसका है सच्चा प्रमाण। माता-पिता भी समझें ये सदा, हर वक्त साथ रहना नहीं है वादा। अपेक्षा हो सीमित, विश्वास रहे साथ, यही है रिश्तों की सच्ची परिभाषा। प्रेम ना है आशा, ना कोई अधिकार, ये बस है देना, निस्वार्थ अपार। आभार और समझ जब रिश्तों में आए, सुख-शांति के दीपक जीवन में जगमगाए। निःस्वार्थ और प्रेम हैं गहरे राज़, आत्मचिंतन से खुलते इनके अंदाज़। आशा-अधिकार की बाँधो सीमा, तभी निखरेगी जीवन की गरिमा। उमाकान्त

आओ चलो बातें करें

  आओ चलो बातें करें 🤔😊😂👌😍  बात ही है , जो बाती बनकर लौ जलाए,  बात वही, जो बातों बोतों में बवाल मचाए।  बात ही है, जो ढाढ़स बनकर मन सहलाए,  बात वही, जो सूत्र बनकर प्रसून खिला जाए।   उमाकान्त

काश... मेरी माँ आज भी होती,

 काश... मेरी माँ आज भी होती काश... मेरी माँ आज भी होती, अपनी पोती की शादी में मोह से भीगती। कभी उसे सँवारती, कभी दुल्हन-सी सजाती, कभी भीगी पलकों से मुस्कराती, कभी नजरें फेर इठलाती। जयेश को देख हौले से मुस्काती, चुपके से उसका माथा चूम दुलराती, 'ख्याल रखना मेरी बच्ची का'  धीमे से कानों में ये प्यार भरी सीख सुनाती। काश... मेरी माँ होती, तो मैं भी थक कर उसके आँचल में सिमट जाता, भीड़-भाड़ से बचकर उसके सीने से लग जाता। जब जिम्मेदारियाँ बोझ बनतीं, वो एक चुम्बन से सब हल्का कर देती। हर रस्म में उसकी आँखों की चमक कुछ और होती, फेरे देख उसकी पलकें भीग-सी जातीं। वो कहती, 'कमियाँ नहीं, दुआएँ देना', हर अनहोनी को अपने आशीर्वादों से ढँक लेती। कोई उसकी मौजूदगी में ऊँचा स्वर न उठाता, और वह, हर चूक को हँसते-हँसते माफ कर जाती। विदाई की घड़ी में, वो मुझे कसकर थाम लेती, मेरी बहती आँखों को अपने आँचल से चुपके से पोंछ लेती। काश... मेरी माँ होती, तो मैं यूँ चुपचाप न रोता, उसकी बाहों में अपने सपनों को सहेज लेता। आज जब मेरी बेटी डोली में बैठेगी, मेरा दिल चुपके से उसकी ममता को खोजेगा। काश... मेरी मा...

आओ मिलकर गीत रचें

 ढली रात, फिर सवेरा हुआ, काली घटाएँ छँटने लगीं। ग़म के सागर गहरे सही, पर खुशियाँ भी फिर उछलेंगी। कुछ साथी छूटे राहों में, पर यादें उनकी मुस्काएँगी। उनकी सीख, उनके अफ़साने, ज़िंदगी को फिर रंग लाएँगी। चलो नया कोई रस्ता खोजें, बैठें मिलकर, साथ में चलें। जीवन के रंग बिखरें ऐसे, जैसे बहारें हर सू खिलें। हर मोड़ पर हो उजियारा, हर दिल में हो विश्वास नया। आओ मिलकर गीत रचें हम, जीवन बने मधुर गान नया। उमाकान्त

मौन की भाषा

खोज में निकला था, बाहर उमाकान्त, शब्दों में सच था, पर मन था शान्त। तर्कों के साए में भटका बहुत, पर सत्य न पाया, रहा बस विभ्रांत। बुद्ध ने कहा, “दीपक स्वयं बनो,” विवेकानंद बोले, “खुद को पहचानो।” कृष्णमूर्ति की वाणी गूंजे कहीं, “जो ज्ञात है, बस भ्रम है यहीं।” सत्य न ग्रंथों में, न शास्त्रों की रीत, न वाद-विवाद, न तर्कों की जीत। यह तो बस मौन की भाषा में बसता, हृदय की गहराइयों में ही हंसता। जो भीतर उतरे, वही जान पाए, जो खुद को समझे, वही सत्य पाए। खोलो यह पर्दा, हटाओ यह धुंध, सत्य वहीं है, जहां हो अनुगंध। उमाकान्त

छोटी सी गुड़िया

 छोटी सी गुड़िया कब बड़ी हो गई।  कल ही तो गोद में थी,  हंसती गाती फूलों सी कोमल कली आज निडर हो गई छोटी सी गुड़िया कब बड़ी हो गई।  पलक झपकते ही ऋतुऐं कितनी बदल गई कल की नन्ही नन्ही बातें आज कहानी हो गई छोटी सी गुड़िया कब बड़ी हो गई।  मेरे सपनों की परी आज आसमान छूने को है नन्हा सा पंछी अब उड़ान भरने को है अभी तो सुबह थी कब सांझ हो गई छोटी सी गुड़िया कब बड़ी हो गई।  याद है वह दिन नन्हे हाथों से मेरी उंगली थामी थी  दो कदम क्या चली, सुंदर सी चप्पल खरीदी थी  आज मेरी आरजू उसकी हो गई छोटी सी गुड़िया कब बड़ी हो गई। उमाकान्त

सफर यही है, मंज़िल यही

  अच्छा बनने की कोशिश में, हर दिन नया कदम बढ़ाता हूं, गलतियों से सबक लेकर, खुद को फिर से गढ़ पाता हूं। तमन्ना है बस इतनी दिल में, जहां भी जाऊं, असर छोड़ जाऊं, नरमी बनूं हर लफ़्ज़ में, और हर दिल में ख़ुशबू सा कुछ छोड़ जाऊं। राहें कभी मुश्किल होती हैं, पर मैं थक कर बैठ नहीं जाता, दूसरों के दर्द को समझकर, हर लम्हा बस प्रेम बरसाता। जब आप कहें — “तुम अच्छे हो”, तो दिल को राहत मिलती है, और जब कहें — “और बेहतर बनो”, तो आत्मा को हिम्मत मिलती है। यही है मेरा जीवन-सफर, यही मेरी असली मंज़िल है — अच्छाई का दीप जलाना, और दुनिया को थोड़ा और ख़ूबसूरत बनाना। Umakant

दिल सिर्फ दिल से

दोस्त दिल के दरवाजे से आते हैं, मोहब्बत की रौशनी जगाते हैं। दौलत से खरीदे जहां के सभी साजो-सामान, मगर दिल की दौलत से ही, दिलों के दर खुलते हैं। दिल की चौखट पर जब दोस्त आते हैं,  मोहब्बत के दीप वहां जलाते हैं। हर कोना रौशन हो उठता है फिर, जब मुस्कान से जज़्बात सजाते हैं। सोने-चांदी से सजे हैं कई मकान, पर उनमें नहीं वो अपनापन का गान। जो दिल से मिले, वो दिल में बस जाए, वो दौलत नहीं, जो हर दिल को भाए। सजाएं महल या खरीदें ज़मीन, बिन सच्चे जज़्बे, सब बातें अधीन। दिल की दौलत हो, तो रिश्ते भी खिलते हैं, वरना ताले तो दरवाज़ों पर भी मिलते हैं।

तुझे क्या खबर

  तुझे क्या खबर… तुझे क्या खबर, तुझको मैं कितना अपनी रूह में बसाए रखता हूँ। जज्बातों को लफ्ज़ों में ढालूं कैसे, हर अल्फाज़ में तुझी को तलाशता हूँ… तुझे क्या खबर, तुझको मैं कितना... अगर पढ़ सके तो पढ़ के देख, मौन रहकर भी हर पल, तेरी धड़कनों से बात करता हूँ… तुझे क्या खबर, तुझको मैं कितना... हर लम्हा कटता है तेरी यादों में घुलकर, तू अहसास है, जो सांसों में महकता हूँ… तू ही नूर, तू ही सुकून मेरा, हर धड़कन में तेरा नाम लिखता हूँ… तुझे क्या खबर, तुझको मैं कितना…

खींची मैंने रेखा पे रेखा

 पूजा बत्ती करली मैंने  मंदिर भोग लगा आया, लोगों को मन्तर आता नहीं मैंने तो मन्तर भी गाया  कर दान रुपे दो मंदिर में, मैं दानवीर भी कहलाया। दोष दिखें  औरों में मुझको , मेरी तो निर्दोषी काया ,  नही क्रोध मुझ में थोड़ा भी , पर औरों पे गुस्सा आया , अहम नही मुझ में बोलो मैंने तो मैं को ही पाया ज्ञान बहुत मुझ में मगर औरो में भूसा देखा अहम के जंजाल में फंस, खींची मैंने रेखा पे रेखा

पक्का धागा

पक्का धागा बहन चाहे जितनी भी दूर हो,  भाई को नहीं भूलती । भाई के मन में भी बहन हमेशा,  हिलोरे लिये झूलती । बंधन है यह पक्के धागे का, बहन बेटी मन के रागों का,  कलाई अपने आप उठकर  अपने माथे को चूमती ॥ बहन और बेटी को शत-शत नमन हैप्पी रक्षा बंधन 

रिश्ते ही जीवन का संगीत

 कुछ लोग कड़वी यादों को सीने में छुपाते हैं, बस रिश्तों को तोड़ने के बहाने बनाते हैं। कुछ लोग मीठी बातों से दिल को सजाते हैं, हर लम्हे को रिश्तों का पर्व बनाते हैं। रिश्ते ही तो जीवन का है संगीत  इन्हीं से हर धड़कन में है प्रीत। जो रिश्तों को शतरंज की बिसात मान लेते हैं, विश्वास को मोहरे की तरह चला जाते हैं, शतरंज में जीता जा सकता है, पर रिश्तों में अक्सर  दिल की बाज़ी हार जाते हैं।

आनंद

 तुम खुश हो अपनी किसी खुशी में,  ये साधारण सी बात  है आनंद की बात यह है कि आपकी खुशी में दूसरे लोग फूले ना समाएँ 

खुद से दूर

आदमी पास होकर भी, दूर हो जाता है दूर हो , पास होने के लिए तरसता है अजीब सी दुनिया है तेरी भगवन खुद ही खुद से दूर हो जाता है

बात बात पे

मैं तेरी बात पे, तू मेरी बात पे , और , बात एक ही है मैं कुछ कह रहा था, तू कुछ सुन रहा था, तू कुछ कह रहा था, मैं कुछ समझ रहा था। और फिर... हम दोनों इस मुगालते में थे, कि हम एक-दूसरे से लड़ रहे हैं, जबकि लड़ाई बस अहं से थी — बात तो अब भी वहीं की वहीं थी।

चार भाई तीन बहन

चार भाई, तीन बहन चारों दिश सत्संग  प्रेम पताका  लहरा रही  चौतरफा बरसे रंग  हे प्रभु ! बहती रहे जलधार  ना हो कोई अंत  खुशियां अनगिनत  उमड़े आनंद अनंत 10.03.2020

खजाना

जहां खोजने चला तू ख़ज़ाने को, घर छोड़ आया वह ख़ज़ाना तो ज़माने को। जिस ममता ने तुझको चलना सिखाया, तू छोड़ आया वही आँचल के तराने को। जो आंखें बरसों तेरी राह तकती रहीं, तू अकेला छोड़ आया उनके अफ़साने को। सांसों में उनकी अब तेरा ही नाम है, पर तू भुला बैठा उनकी उस दीवानेपन को। दौलत की चमक में वो सुकून न मिलेगा, जो छोड़ आया तू अपने पुराने ठिकाने को। 02.05.2020

कवि नवाब केसर

विरासते अलीगढ में जब खिला वो  गुलाब  हर शख्स ढूंढ रहा जटिल प्रश्नों के जवाब हृदय सरल हो तो जटिलता कहां  गौर से देखो जवाबों में हमारे नवाब भावों से भरी हो जिंदगी  तो हर दिल में बजे रवाब कवि हो या उसकी कविता  कहीं ना कहीं है हमारे केसर नवाब 01.07.2020

पिता की नम ऑखें

 क्या कहती है यह आंखें  क्या बोले यह मन  कुछ दिनों का पहरेदार हूं भाइयों  कर लो प्रेम मिलन याद रखेगी दुनिया, गर याद रखोगे तुम  मन से ही मन को समझ लो , शब्दों का करो दमन  जीवन है छोटा सा भैया, खुशियों की घड़ियां बटोर लो  इस कड़वी दुनिया में,  कुछ मीठे पल बिखर लो फोन करोगे मुझको तो, आशीष ही मिलेगा  लेकर कुछ जाना नही , सब तुम्हें ही मिलेगा  समझ समझ में कुछ नहीं बिना समझे ही दिल लगा ले  कुछ क्षण मुझको दे दो  थोड़ा मुझ में मन लगा ले  21.12.2017

सवाल और जवाब

 जिंदगी में सवाल भी देखें  और  जवाब भी देखें  ए मशक्कत भरी जिंदगी  जवानों की जगह इल्जामों के हमले हजार देखे जिंदगी नासूर बन जाती है सुना था हमने  हकीकत में बदलते सवाल और जवाब देखें

धुन

आज भी जिंदगी  तुम्हारे हाथ में है  कल भी थी और कल भी तुम्हारे हाथ में है परिभाषा तुम दोगे  जिंदगी तो को तो, अपनी धुन में चलना है

कश्मकश

  जिंदगी दो पडावों के  कश्मकश में  गुजराती चली गई   एक अभी उम्र नहीं और  दूसरी अब उम्र नहीं 26.12.2017 उमाकांत

हमारे प्यारे बाऊजी

  शशि उमा और चंद्र रमा, जब   चरों भाई मिल जाये I मन   ही   मन बाउजी, को फुले   ना   समायें   II हमरे   प्यारे   बाउजी, सबसे   न्यारे बाउजी I हमारे   अच्छे    बाउजी, सबसे   सच्चे   बाउजी II   समय बदला तो वो भी बदले, समय के साथ जाएँ I आधुनिक ज़माने से भी, सामंजस्य बिठायें II हमारे   प्यारे   बाऊजी ........   बहुओं   को   भी   बेटी   माना, पर्दा   प्रथा   हटाई I मात्र रूप सँजोकरके, प्रीत   की    रीत   जगाई II हमारे प्यारे   बाऊजी ........   उतर दक्षिण   पूरब   पश्चिम, चार   दिशा   चार भाई I चहुँ   दिशा में फैली है, इस बगिया की परछाई II हमारे   प्यारे   बाऊजी ........   कृष्णा सरोज औ उषा भी, और भुआजी आजायें इस घर की खुशहाली में, चार चाँद लग जाए II हमारे   प्यारे   बाऊजी ........   पूर्व जन्म के शुभ कर्मों से, ये आशीष है पाया I   धन्य धन...

खत मिला जब तेरा

खत मिला जब तेरा "सजनी",  लिखने का मन हो गया खुली आँखो ने देखा सपना,    मन कही मेरा खो गया   मन करता है, सब कुछ लिख दूँ लिख दूँ आहट - करवट - लिख दूँ पल पल की बेचैनी लिख दूँ लिख दूँ चाहत, तरसट लिख दूँ जब मैने पढ़ा तेरा प्रेम रागना, अखियों से झरना बह गया खुली आँखो ने देखा सपना,  मन कही मेरा खो गया   खत मिला जब तेरा "सजनी", लिखने का मन हो गया कैसे कटेंगी रातें “और” कैसे बीतें दिन, तेरे खयालो में सजनी, काटे दिन गिन गिन खत मिलते ही तेरा सजनी, होश हमारा खो गया ओ सजनी तेरे प्यार में पागल, मैं दीवाना हो गया खत मिला …   कब आई तू दिल में मेरे,  कब धड़कन में समा गयी दिन दहाड़े दिल में घुस कर,  चैन चुराकर ले गयी रपट लिखाउ किस थाने में,  दिल चोरी रे हो गया ओ सजनी तेरे प्यार में पागल मैं दीवाना हो गया खत मिला …

शुभ आशीष

  मेरे सीधे साज, ओ मेरे मीठे संगीत मेरी सरगम, मेरी रागिनी ऐ मेरे सुरीले गीत   मेरे जतन, ओ मेरी साधना मेरी कोशिश, मेरी भावना ए मेरी निश्छल जीत   मेरी खुशबू ओ मेरे फूल मेरी नींव, 'मेरे मूल ए मेरी सर्वग रीत   मेरी लगन, ओ मेरी शमा मेरे भविष्य, मेरे वर्तमा: ए सुन्दर स्वप्निल अतीत   मेरे मन की ज्योती, ए मेरे मन के मीत मेरी चीनू ओ मेरी मीनू ए मेरे परम् प्रीत   खुश रखेंगे सदा, मेरे ईश्वर मेरे ईश तीक्ष्ण तरंगें निकल रही है बन कर शुभ आशीष 

मनवीणा

    दीवाली पे तूने जो दीप जलाया है खुश होकर खुद लक्ष्मीजीने 'तेरा दर सजाया है।   सुन्दर साँवली सलोनी सी. ‘शालीन’ सजल सम कोयल सी, उस ‘आलोकित’ दीप की ज्योती ने, उस मादक मन की मोहनी ने, हर मन महकाया है खुश होकर   …   अरे, राजयोग लेकर आयी वो खुद बनेगी शहनाई घुटमन दोडेगी आँगन में किलकारी गूंजेंगी दामन में अब खुशीयों की छाया है खुश होकर …   दादी की बनेगी वो ताई अपनी मम्मी की परछाई पुलकित मन की मनवीणा सूंदर हाथों वो हिना हर सुर समाया है खुश होकर …

पैगाम

  भ्रम था अभी तक हमें    “कि" दिल हमारा हमारे पास है महसूस हुआ आज        “कि" हिया कोई और लिये बैठा है   पेबंद किताब की तरह, हम तो बिके चले जारहे थे मालूम हुआ आज,      “कि” पहले से कोई और पढ़े बैठा है   बेलगाम घोड़े की तरह, बढे जा रहे थे जिन्दगी की राहों में ठिठरे हुए लमहो ने बताया “कि” लगाम कोई और थामे बैठा है   मशगुल थे हम तो नौकरी पेशे के प्रश्न ऐ जवाबो में अहसास हुआ आज “कि” प्यार का ये अहसास, कोई पैगाम लिये बैठा है

तुम हो

  हुस्न की परी हो तुम दिल की मलिका हो तुम चाहत की कड़ी तुम हो, तुम हो, तुम हो   मेरे ख्वाबो की रानी, महकती जवानी मेरे जीवन की कहानी तुम हो, तुम हो, तुम हो   गर्मी की जलन, जाड़े की तड़प फूलो की महक, पंछी की चहक सावन की बरखा तुम हो तुम हो तुम हो   उमाकान्त भवानी रूप सयानी , बंक बावरी और थोड़ी रूमानी तुम हो तुम हो तुम हो

तेरी मुस्कान

  तेरी मुस्कान अब, इस दिल में समा गयी अँधेरी रातो में, रोशनी छा गयी   पहली मुलाकात में, शर्माए थे हुज़ूर शर्मा के थोड़ा मुस्काये थे जुरूर वो मुस्कराहट क्या गुल खिला गयी अँधेरी रातो ….   मिलके अभी दूर हुए, फिर भी मचलता है जिया कैसे कहूं, क्या मैं कहूं, जैसे बिन बाती दिया वो अगन सब, दीप जला गयी   अँधेरी रातो …

गीत : चांदनी चुरा कर

  दो दिन   दो दिन मिलकर हाए 'सनम" दीवाना कर गये पानी दिखा कर वो, प्यासा ही छोड गये   कहते थे चांद हो तुम, सितारे भी ना रहे, चाँदनी चुराकर 'सनम’, अंधेरा.. अंधेरा कर गये दो दिन मिलकर …   वादे किये हजार हाए, वो वादे कहाँ गये, चले थे मिलकर साथ, अकेला छोड गये। दो दिन मिलकर …   कैसे थे पहले "और अब", क्या से क्या हो गये जीने की चाह है, 'मगर' जीने लायक ना रहे   लिखा नहीं था कभी, आज लिखते चले गये " उमा " गजल सुनकर 'सनम', वापस तो आ गये।   बिछड़े हुए दो प्रेमी आज एक होगये चादनी जो चांद को मिली, सितारे खिल गये

प्यार की डगर

चांद का नगर,  चांदनी का पहर लोग सोते हुए,  जाग जाते है।                                                          जिन्दगी का सफर,  प्यार की हो डगर गम यूँ ही दूर,  भाग जाते है I लोग सोते हुए,  जाग जाते है। चांद का नगर,  चांदनी का पहर लोग सोते हुए,  जाग जाते है।   ढूँढो ढूंढो जरा,  स्वर्ग की वो धरा, जहाँ दुःख,  नजर नही आते है। लोग सोते हुए,  जाग जाते है। चांद का नगर,  चांदनी का पहर लोग सोते हुए,  जाग जाते है।   दर्द को समझें दर्द,  दुःखों में दें मदद बाते करते अजब,  फिर देखो गजब दुश्मन भी दोस्त बन जाते है। लोग सोते हुए,  जाग जाते है। चांद का नगर,  चांदनी का पहर लोग सोते हुए,  जाग जाते है।