कक्षा दस है मोड़ ज़िंदगी का, शुरुआत यहाँ से उड़ान की, मेहनत का रस पी जो ले, खुल जाएं राहें सम्मान की। ग्यारह–बारह बस दो कदम हैं, जो तय करें भविष्य की राह, पढ़ना समझना गहराई से, यही सफलता का है गवाह। सवालों से मत डर बेटा, हर प्रश्न है एक साथी तेरा, जो हल करेगा धैर्य रख, जीत लेगा संसार सारा। समय को जो देता सम्मान, वो पाता है ऊँचा स्थान, जो ध्यान भटकाए मन का दीप, उसे मिलता संघर्ष का दान। इसलिए अभी से ठान ले दिल में, "हर दिन कुछ बेहतर करना है", ज्ञान की ज्योति जलाकर खुद में, भविष्य अपना गढ़ना है।
कचरे का भी मुक़द्दर बदल सकता है, टूटी मशीनों में भी अंकुर पल सकता है। लोहे की नीरस देह में हरी कली मुस्काई, मृत उपकरण की धड़कन फिर से गुनगुनाई। जहाँ था कभी सर्किट, अब हरियाली है, ई–कचरे में जीवन की नई लाली है। सीखा यह पत्ता, न कोई चीज़ बेकार, हर अंत में छुपा है शुरुआत का उपहार। जो फेंका गया कल, आज जीवन रचता है, हर जंग लगा टुकड़ा भी उम्मीद बुनता है। आओ हम भी देखें हर टूटे में नवप्रभात, कुछ नहीं है कचरा बस दृष्टि की बात।