दो दिन
पानी दिखा कर वो, प्यासा ही
छोड गये
कहते थे चांद हो तुम, सितारे
भी ना रहे,
चाँदनी चुराकर 'सनम’, अंधेरा..
अंधेरा कर गये
दो दिन मिलकर …
वादे किये हजार हाए, वो वादे
कहाँ गये,
चले थे मिलकर साथ, अकेला छोड
गये।
दो दिन मिलकर …
कैसे थे पहले "और अब",
क्या से क्या हो गये
जीने की चाह है, 'मगर' जीने
लायक ना रहे
लिखा नहीं था कभी, आज लिखते
चले गये
" उमा " गजल सुनकर 'सनम', वापस तो आ गये।
बिछड़े हुए दो प्रेमी आज एक
होगये
चादनी जो चांद को मिली, सितारे
खिल गये
Comments
Post a Comment