तेरी मुस्कान अब,
इस दिल में समा गयी
अँधेरी रातो में,
रोशनी छा गयी
पहली मुलाकात में,
शर्माए थे हुज़ूर
शर्मा के थोड़ा मुस्काये थे
जुरूर
वो मुस्कराहट क्या गुल खिला
गयी
अँधेरी रातो ….
मिलके अभी दूर हुए,
फिर भी मचलता है जिया
कैसे कहूं, क्या मैं कहूं,
जैसे बिन बाती दिया
वो अगन सब, दीप जला गयी
अँधेरी रातो …
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