भ्रम था अभी तक हमें “कि"
दिल हमारा हमारे पास है
महसूस हुआ आज “कि"
हिया कोई और लिये बैठा है
पेबंद किताब की तरह,
हम तो बिके चले जारहे थे
मालूम हुआ आज, “कि”
पहले से कोई और पढ़े बैठा है
बेलगाम घोड़े की तरह,
बढे जा रहे थे जिन्दगी की राहों
में
ठिठरे हुए लमहो ने बताया “कि”
लगाम कोई और थामे बैठा है
मशगुल थे हम तो
नौकरी पेशे के प्रश्न ऐ जवाबो
में
अहसास हुआ आज “कि”
प्यार का ये अहसास,
कोई पैगाम लिये बैठा है
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