आदमी पास होकर भी
दूर
हो जाता है I
दूर
रहकर
पास
आने के लिए तरसता है I
अजीब
सी दुनिया है
तेरी
भगवान्
“खुदकश”
खुद
को ही खुद से
दूर करता है I
कुछ अल्फ़ाज़ कागज़ पर उतरते हैं, कुछ रिश्तों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। 👇 नीचे स्क्रॉल करें—हर पोस्ट एक नई कहानी, एक नई अनुभूति लेकर आपका इंतज़ार कर रही है। गीत • भजन • ग़ज़ल • कविताएँ • कहानियाँ
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