छोटी सी गुड़िया कब बड़ी हो गई।
कल ही तो गोद में थी,
हंसती गाती फूलों सी कोमल कली आज निडर हो गई
छोटी सी गुड़िया कब बड़ी हो गई।
पलक झपकते ही ऋतुऐं कितनी बदल गई
कल की नन्ही नन्ही बातें आज कहानी हो गई
छोटी सी गुड़िया कब बड़ी हो गई।
मेरे सपनों की परी आज आसमान छूने को है
नन्हा सा पंछी अब उड़ान भरने को है
अभी तो सुबह थी कब सांझ हो गई
छोटी सी गुड़िया कब बड़ी हो गई।
याद है वह दिन नन्हे हाथों से मेरी उंगली थामी थी
दो कदम क्या चली, सुंदर सी चप्पल खरीदी थी
आज मेरी आरजू उसकी हो गई
छोटी सी गुड़िया कब बड़ी हो गई।
उमाकान्त
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