दीवाली पे तूने जो दीप जलाया
है
खुश होकर खुद लक्ष्मीजीने
'तेरा दर सजाया है।
सुन्दर साँवली सलोनी सी.
‘शालीन’ सजल सम कोयल सी,
उस ‘आलोकित’ दीप की ज्योती
ने,
उस मादक मन की मोहनी ने,
हर मन महकाया है
खुश होकर …
अरे, राजयोग लेकर आयी
वो खुद बनेगी शहनाई
घुटमन दोडेगी आँगन में
किलकारी गूंजेंगी दामन में
अब खुशीयों की छाया है
खुश होकर …
दादी की बनेगी वो ताई
अपनी मम्मी की परछाई
पुलकित मन की मनवीणा
सूंदर हाथों वो हिना
हर सुर समाया है
खुश होकर …
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