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प्यार की डगर

चांद का नगर, चांदनी का पहर

लोग सोते हुए, जाग जाते है।

                                                        

जिन्दगी का सफर, प्यार की हो डगर

गम यूँ ही दूर, भाग जाते है I

लोग सोते हुए, जाग जाते है।

चांद का नगर, चांदनी का पहर

लोग सोते हुए, जाग जाते है।

 

ढूँढो ढूंढो जरा, स्वर्ग की वो धरा,

जहाँ दुःख, नजर नही आते है।

लोग सोते हुए, जाग जाते है।

चांद का नगर, चांदनी का पहर

लोग सोते हुए, जाग जाते है।

 

दर्द को समझें दर्द, दुःखों में दें मदद

बाते करते अजब, फिर देखो गजब

दुश्मन भी दोस्त बन जाते है।

लोग सोते हुए, जाग जाते है।

चांद का नगर, चांदनी का पहर

लोग सोते हुए, जाग जाते है।


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