फैलेगा
चंद्र जमी पे,
मेहनत
रंग लायेगी
कामयाबी
चरण चूमेगी,
जीत
आपकी कहलायेगी
हिम्मत
ना हारना कभी,
राह
पर बढते जाना
एक
दिन है कठिन राहो को भी,
सामने
आपके झुक जाना
मौसम
के भी कई रूप है,
आँधी
और तूफान भी,
बसन्त
भी फिर आता है
खुशीयाँ
की वर्षात भी
दरीया
भी टकराती है
शूलों
चौर चट्टानो से
बढ़ती
जाती है हमेशा,
उध्येश्य
के अरमानो से
जीत
जाती है जूझ जूझ कर
सागर
में मिल जाती है
उध्येश्य
हुआ पूरा उसका,
उदाहरण एक बन जाती हो
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