बड़ी अजीब सी बात है
खिलाने
चले रिश्तों के फूल
ढूंढ़ने
में लगे उन्हीं की भूल
गुलाब
की खुशबु लेनी है
कांटों
को गिनना छोड़लो
फूल
तोड़ने से पहिले
प्यार
से सींच लो
जीवन
में
खुशबु
ही खुशबु है
बस
खुशबु
बिखेरना
सीख लो
तोड़ने
से पहिले
बस
जड़ों को
सींचना
सीख लो
Comments
Post a Comment