पक्का धागा
बहन चाहे जितनी भी दूर हो,
भाई को नहीं भूलती ।
भाई के मन में भी बहन हमेशा,
हिलोरे लिये झूलती ।
बंधन है यह पक्के धागे का,
बहन बेटी मन के रागों का,
कलाई अपने आप उठकर
अपने माथे को चूमती ॥
बहन और बेटी को शत-शत नमन
हैप्पी रक्षा बंधन
कुछ अल्फ़ाज़ कागज़ पर उतरते हैं, कुछ रिश्तों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। 👇 नीचे स्क्रॉल करें—हर पोस्ट एक नई कहानी, एक नई अनुभूति लेकर आपका इंतज़ार कर रही है। गीत • भजन • ग़ज़ल • कविताएँ • कहानियाँ
पक्का धागा
बहन चाहे जितनी भी दूर हो,
भाई को नहीं भूलती ।
भाई के मन में भी बहन हमेशा,
हिलोरे लिये झूलती ।
बंधन है यह पक्के धागे का,
बहन बेटी मन के रागों का,
कलाई अपने आप उठकर
अपने माथे को चूमती ॥
बहन और बेटी को शत-शत नमन
हैप्पी रक्षा बंधन
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