चार भाई, तीन बहन
चारों दिश सत्संग
प्रेम पताका लहरा रही
चौतरफा बरसे रंग
हे प्रभु !
बहती रहे जलधार
ना हो कोई अंत
खुशियां अनगिनत
उमड़े आनंद अनंत
10.03.2020
कुछ अल्फ़ाज़ कागज़ पर उतरते हैं, कुछ रिश्तों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। 👇 नीचे स्क्रॉल करें—हर पोस्ट एक नई कहानी, एक नई अनुभूति लेकर आपका इंतज़ार कर रही है। गीत • भजन • ग़ज़ल • कविताएँ • कहानियाँ
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