जहां खोजने चला तू ख़ज़ाने को,
घर छोड़ आया वह ख़ज़ाना तो ज़माने को।
जिस ममता ने तुझको चलना सिखाया,
तू छोड़ आया वही आँचल के तराने को।
जो आंखें बरसों तेरी राह तकती रहीं,
तू अकेला छोड़ आया उनके अफ़साने को।
सांसों में उनकी अब तेरा ही नाम है,
पर तू भुला बैठा उनकी उस दीवानेपन को।
दौलत की चमक में वो सुकून न मिलेगा,
जो छोड़ आया तू अपने पुराने ठिकाने को।
02.05.2020
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