क्या कहती है यह आंखें
क्या बोले यह मन
कुछ दिनों का पहरेदार हूं भाइयों
कर लो प्रेम मिलन ।
याद रखेगी दुनिया,
गर याद रखोगे तुम
मन से ही मन को समझ लो ,
शब्दों का करो दमन
जीवन है छोटा सा भैया, खुशियों की घड़ियां बटोर लो
इस कड़वी दुनिया में, कुछ मीठे पल बिखर लो
फोन करोगे मुझको तो, आशीष ही मिलेगा
लेकर कुछ जाना नही , सब तुम्हें ही मिलेगा
समझ समझ में कुछ नहीं
बिना समझे ही दिल लगा ले
कुछ क्षण मुझको दे दो
थोड़ा मुझ में मन लगा ले
21.12.2017

सहेज लें जिंदगी अपनी , बटोर लें कुछ खुशी के पल , उतरें और गहरे अपने मन में , छूलें चेतना को ...
ReplyDeleteThank you for complements and blessings
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