तुझे क्या खबर…
तुझे क्या खबर, तुझको मैं कितना
अपनी रूह में बसाए रखता हूँ।
जज्बातों को लफ्ज़ों में ढालूं कैसे,
हर अल्फाज़ में तुझी को तलाशता हूँ…
तुझे क्या खबर, तुझको मैं कितना...
अगर पढ़ सके तो पढ़ के देख,
मौन रहकर भी हर पल,
तेरी धड़कनों से बात करता हूँ…
तुझे क्या खबर, तुझको मैं कितना...
हर लम्हा कटता है तेरी यादों में घुलकर,
तू अहसास है, जो सांसों में महकता हूँ…
तू ही नूर, तू ही सुकून मेरा,
हर धड़कन में तेरा नाम लिखता हूँ…
तुझे क्या खबर, तुझको मैं कितना…
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