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Showing posts from August, 2025

अब ससुराल संवारना

 दोहा :  बिटिया सुख की छाँव है, बिटिया जीवन प्राण आज समर्पण कर रहे,  करके कन्यादान गीत ओ समधी जी......ओ समधन जी ..... हम पर इक,         उपकार करो । बड़ा कठिन है, ये क्षण जीवन का ,  दिल से दिल का,         दान करो ।। बिटिया हमारी लाडली , सबके आँखों की ज्योति है।   हर सुख-दुःख में संग खड़ी,  ममता की महक निराली है।।      घर आँगन की किलकारी, हर दुःख की मुस्कान बनी।    पापा के  साँसों की धड़कन,  माँ के मन की प्रीति बनी।।   ओ समधी जी......ओ समधन जी ..... जब मिल जाये शगुन हो जाये , हर घर में खुशियां भर जाये।   नए काम की शुरुआत में,          स्वयं खड़ी महूरत बन जाये।।    आज सजी है दुल्हन बन के,      नयन नीर से भरे हुए ।   तेरे सपनों का हर उजियारा, अब नए आंगन सँवारे हुए ।।   ओ समधी जी......ओ समधन जी ..... जग की रीत पुरानी है ये,        अब ससुराल सँवारना । हर रिश्ता अपना...

माँ-बाप का जीवन, त्याग की कहानी

 प्रेम का असली अर्थ माँ-बाप का जीवन, त्याग की कहानी, हर सुख-स्वप्न छोड़े, बस बच्चों की रवानी। हर चाहत भूले, अपना सब कुछ खोया, उनके लिए हर दिन, हर सपना संजोया। प्रेम ना है आशा, ना कोई अधिकार, ये बस है देना, निस्वार्थ अपार। आभार और समझ जब रिश्तों में आए, सुख-शांति के दीपक जीवन में जगमगाए। बच्चे समझें हक़, बस लेते ही जाएँ, पर कर्म से रिश्ते की गहराई बढ़ाएँ। ऋण ये नहीं, है ईश्वर का वरदान, सम्मान ही इसका है सच्चा प्रमाण। माता-पिता भी समझें ये सदा, हर वक्त साथ रहना नहीं है वादा। अपेक्षा हो सीमित, विश्वास रहे साथ, यही है रिश्तों की सच्ची परिभाषा। प्रेम ना है आशा, ना कोई अधिकार, ये बस है देना, निस्वार्थ अपार। आभार और समझ जब रिश्तों में आए, सुख-शांति के दीपक जीवन में जगमगाए। निःस्वार्थ और प्रेम हैं गहरे राज़, आत्मचिंतन से खुलते इनके अंदाज़। आशा-अधिकार की बाँधो सीमा, तभी निखरेगी जीवन की गरिमा। उमाकान्त

आओ चलो बातें करें

  आओ चलो बातें करें 🤔😊😂👌😍  बात ही है , जो बाती बनकर लौ जलाए,  बात वही, जो बातों बोतों में बवाल मचाए।  बात ही है, जो ढाढ़स बनकर मन सहलाए,  बात वही, जो सूत्र बनकर प्रसून खिला जाए।   उमाकान्त