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Showing posts from 2024

सफर यही है, मंज़िल यही

  अच्छा बनने की कोशिश में, हर दिन नया कदम बढ़ाता हूं, गलतियों से सबक लेकर, खुद को फिर से गढ़ पाता हूं। तमन्ना है बस इतनी दिल में, जहां भी जाऊं, असर छोड़ जाऊं, नरमी बनूं हर लफ़्ज़ में, और हर दिल में ख़ुशबू सा कुछ छोड़ जाऊं। राहें कभी मुश्किल होती हैं, पर मैं थक कर बैठ नहीं जाता, दूसरों के दर्द को समझकर, हर लम्हा बस प्रेम बरसाता। जब आप कहें — “तुम अच्छे हो”, तो दिल को राहत मिलती है, और जब कहें — “और बेहतर बनो”, तो आत्मा को हिम्मत मिलती है। यही है मेरा जीवन-सफर, यही मेरी असली मंज़िल है — अच्छाई का दीप जलाना, और दुनिया को थोड़ा और ख़ूबसूरत बनाना। Umakant

दिल सिर्फ दिल से

दोस्त दिल के दरवाजे से आते हैं, मोहब्बत की रौशनी जगाते हैं। दौलत से खरीदे जहां के सभी साजो-सामान, मगर दिल की दौलत से ही, दिलों के दर खुलते हैं। दिल की चौखट पर जब दोस्त आते हैं,  मोहब्बत के दीप वहां जलाते हैं। हर कोना रौशन हो उठता है फिर, जब मुस्कान से जज़्बात सजाते हैं। सोने-चांदी से सजे हैं कई मकान, पर उनमें नहीं वो अपनापन का गान। जो दिल से मिले, वो दिल में बस जाए, वो दौलत नहीं, जो हर दिल को भाए। सजाएं महल या खरीदें ज़मीन, बिन सच्चे जज़्बे, सब बातें अधीन। दिल की दौलत हो, तो रिश्ते भी खिलते हैं, वरना ताले तो दरवाज़ों पर भी मिलते हैं।

तुझे क्या खबर

  तुझे क्या खबर… तुझे क्या खबर, तुझको मैं कितना अपनी रूह में बसाए रखता हूँ। जज्बातों को लफ्ज़ों में ढालूं कैसे, हर अल्फाज़ में तुझी को तलाशता हूँ… तुझे क्या खबर, तुझको मैं कितना... अगर पढ़ सके तो पढ़ के देख, मौन रहकर भी हर पल, तेरी धड़कनों से बात करता हूँ… तुझे क्या खबर, तुझको मैं कितना... हर लम्हा कटता है तेरी यादों में घुलकर, तू अहसास है, जो सांसों में महकता हूँ… तू ही नूर, तू ही सुकून मेरा, हर धड़कन में तेरा नाम लिखता हूँ… तुझे क्या खबर, तुझको मैं कितना…

खींची मैंने रेखा पे रेखा

 पूजा बत्ती करली मैंने  मंदिर भोग लगा आया, लोगों को मन्तर आता नहीं मैंने तो मन्तर भी गाया  कर दान रुपे दो मंदिर में, मैं दानवीर भी कहलाया। दोष दिखें  औरों में मुझको , मेरी तो निर्दोषी काया ,  नही क्रोध मुझ में थोड़ा भी , पर औरों पे गुस्सा आया , अहम नही मुझ में बोलो मैंने तो मैं को ही पाया ज्ञान बहुत मुझ में मगर औरो में भूसा देखा अहम के जंजाल में फंस, खींची मैंने रेखा पे रेखा

पक्का धागा

पक्का धागा बहन चाहे जितनी भी दूर हो,  भाई को नहीं भूलती । भाई के मन में भी बहन हमेशा,  हिलोरे लिये झूलती । बंधन है यह पक्के धागे का, बहन बेटी मन के रागों का,  कलाई अपने आप उठकर  अपने माथे को चूमती ॥ बहन और बेटी को शत-शत नमन हैप्पी रक्षा बंधन