विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों, दो संस्कृतियों और दो हृदयों के स्नेहपूर्ण मिलन का उत्सव है। कन्यादान के पावन क्षण में माता-पिता के मन में उमड़ती भावनाओं को शब्द देना आसान नहीं होता। "ओ समधी जी... ओ समधन जी..." उसी भावभूमि से जन्मी एक मौलिक रचना है, जिसमें बेटी के प्रति असीम स्नेह, उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना और समधी-समधन से उसे प्रेमपूर्वक अपनाने का विनम्र अनुरोध व्यक्त किया गया है। यह गीत केवल एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि विश्वास, अपनत्व और रिश्तों की गरिमा का भावपूर्ण संदेश है। आशा है कि इसकी पंक्तियाँ आपको भी उन अनमोल क्षणों से जोड़ देंगी, जहाँ विदाई के आँसू और नए जीवन की मुस्कान एक साथ खिल उठते हैं। प्रस्तुत हैं इस भावपूर्ण विवाह गीत के सम्पूर्ण बोल दोहा : बिटिया सुख की छाँव है, बिटिया जीवन प्राण आज समर्पण कर रहे, करके कन्यादान गीत ओ समधी जी......ओ समधन जी ..... हम पर इक, उपकार करो । बड़ा कठिन है, ये क्षण जीवन का , दिल से दिल का, दान करो ।। बिटिया हमारी लाडली , सबके आँखो...
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