Skip to main content

Posts

माँ... खाना खाया क्या? | माँ की ममता पर एक भावुक हिंदी कविता | असंख्य माँओं के जीवन की सच्ची झलक से प्रेरित।

"बेटा, खाना खाया क्या? " यह केवल पाँच शब्द नहीं, एक माँ का अनंत प्रेम है। असंख्य माँओं के जीवन की सच्ची झलक से प्रेरित। बचपन में यह प्रश्न हमें साधारण लगता है। बड़े होकर कभी-कभी यही प्रश्न हमें व्यस्तता जैसा प्रतीत होता है। लेकिन समय का चक्र जब हमें भी माता-पिता बना देता है, तब समझ आता है कि इस छोटे-से प्रश्न में कितनी चिंता, कितनी दुआ, कितना त्याग और कितना निस्वार्थ प्रेम छिपा था। यह कविता किसी एक माँ की नहीं, उन सभी माताओं को समर्पित है जो अपने बच्चों की हर खुशी में अपना संसार ढूँढ़ लेती हैं। शायद इस कविता को पढ़ते-पढ़ते आपको भी अपनी माँ की वही आवाज़ सुनाई दे "बेटा... खाना खाया क्या?" माँ... खाना खाया क्या? कप की खन-खन सुनते ही बस, लगता माँ अब जाग गई, उस मीठी-सी आवाज़ के संग, घर की हर धड़कन जाग गई। धीरे से कमरे में आकर, माँ ने परदा सरकाया, माथे पर फिर हाथ फेरकर, हँसकर मुझको जगाया। "उठो बेटा, अब सुबह हुई, देखो सूरज आया," माँ की मीठी उस आवाज़ ने, हर आलस दूर भगाया। "माँ... थोड़ी देर और सोने दो..." करवट लेकर मैंने बोला, माँ ने मा...

साँसों का कर्ज़ | दर्द, इंसानियत और रिश्तों की संवेदना पर एक भावपूर्ण हिंदी कविता

  साँसों का कर्ज़  दर्द, इंसानियत और रिश्तों की संवेदना पर एक भावपूर्ण हिंदी कविता दर्द किसी का भी हो , दर्द कभी पराया नहीं होता। एक कराह उठे जहाँ कहीं , वहाँ आसमान भी चुप नहीं होता। साँसें तो सबके सीने में , चुपचाप सफ़र करती हैं। पर कुछ साँसें ऐसी होती हैं , जो दूसरों के लिए भी जीती हैं। होंठों की हमदर्दी से ज़ख्म कहाँ भर पाते हैं ? मरहम तो वही बनते हैं , जो अपने हाथ बढ़ाते हैं। खाली दिखावे की धूप में , रिश्तों की फसल नहीं पकती। नेकी की भीगी मिट्टी पर, इंसानियत अंकुरित होती। घड़ियाली आँसू बहाने से , तक़दीर नहीं सँवरती है। बाज़ू चढ़ाकर चल पड़ो तो , राह भी ख़ुद निखरती है। किसी की बुझती साँसों में यदि उम्मीद की लौ भर दो , अपने हिस्से की धूप समेटो , उसके आँगन में बिखेर दो। दीप वही क्या दीप कहाए , जो बस अपने घर में जले ? सूरज बनना हो तो यारो, हर देहरी पर भोर खिले। जीवन का क्या मोल अगर, बस अपनी धड़कन सुनते रहे। जीना तो तब है, जब रिश्तों की धड़कन बन...

The Planets Hidden in Our Relationships | An Inspirational Song Inspired by Indian Vedic Wisdom - Astrology

  The Planets Hidden in Our Relationships (An Inspirational Song Inspired by Indian Vedic Wisdom - Astrology) Chorus The planets are not only shining high, Far beyond the endless sky. They live within the hearts we share, In every bond, in every prayer. Love and kindness, truth and care, Are the greatest gifts we bear. When relationships bloom with light, Even destiny begins to shine bright. ☀️ Sun When pride makes you oppose your father, When respect begins to matter less, When duty slowly fades away, The Sun may have a truth to say. A father is more than flesh and name, He lights our path with wisdom's flame. Honor his words, receive his grace, Walk life's journey with humble pace. Live with discipline, truth, and pride, Let integrity become your guide. Then the Sun begins to rise, Strength awakens deep inside. Honor, courage, noble fame, Light your life with heaven's flame. 🌙 Moon When your mother's eyes grow wet, When anger fills your heart instead, When love and c...

रिश्तों में छुपे ग्रहों के संकेत | एक वैदिक प्रेरणा गीत

  रिश्तों में प्रकट होते  नवग्रह (एक वैदिक प्रेरणा गीत) मुखड़ा ग्रह केवल अम्बर में हों,   केवल इतना सत्य नहीं, रिश्तों की हर डोर में भी, उनकी लीला कम नहीं। प्रेम, दया, सेवा, सम्मान,  जीवन का सच्चा श्रृंगार, रिश्ते जब मुस्काएँ घर में, खिल उठे नवग्रह संसार॥ 🌞 सूर्य जब पिता से तकरार बढ़े, अहं मन में आकार चढ़े। कर्तव्य से जब मन हट जाए, मानो सूर्य संकेत बताए॥ पिता नहीं केवल एक शरीर, जीवन-पथ के प्रथम नज़ीर। उनके अनुभव का मान करो, आशीष का सम्मान करो। सत्य, श्रम, अनुशासन अपनाओ, अपने वचन सदा निभाओ॥ सूर्य तभी बलवान बने, जीवन में नव प्रभात तने। आत्मबल, यश, सम्मान महान, जग में ऊँचा हो पहचान॥ 🌙 चन्द्र जब माँ की आँखें नम हो जाएँ, मन में चिंता घर कर जाए। ममता का जो मान न जाने, मानो चन्द्र समझाने आए॥ माँ की सेवा सबसे न्यारी, उसमें छिपी जग की फुलवारी। करुणा, क्षमा हृदय में लाओ, कटु स्मृतियों को दूर भगाओ। शीतल वाणी, निर्मल मन, यही चन्द्र का सच्चा धन॥ चन्द्र तभी बलवान बने, मन में शांति का दीप जले। घर-आँगन आनंद से भरे,...

राम नाम की चिंगारी | भाव की हवा बस लगने दो |Ram Raam Bhajan

 यह भजन एक सरल किन्तु गहन आध्यात्मिक सत्य को व्यक्त करता है । राम नाम को प्रज्वलित करने के लिए किसी चमत्कार की नहीं, केवल प्रेम, श्रद्धा और भाव की आवश्यकता है। राम नाम हर हृदय में चिंगारी की तरह विद्यमान है। जब उस पर भक्ति की हवा चलती है, तो वही छोटी-सी चिंगारी जीवन को आलोकित करने वाली ज्योति बन जाती है। यह गीत बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि भीतर की भक्ति, सेवा और समर्पण का निमंत्रण है।  Raam Naam ki Chingari Bhajan Lyrics मुखड़ा राम नाम की चिंगारी है, भाव की हवा बस लगने दो।  राम नाम की ज्योत जलेगी, मन का तम सब मिटने दो॥ राम-राम का नाम जो गूँजे, प्रेम का दीपक जलने दो।  राम नाम की चिंगारी है, भाव की हवा बस लगने दो॥ अंतरा १ मन की लकड़ी सूखी पड़ी है, प्रेम की अग्नि जलने दो।  श्रद्धा की इक छोटी चिनगारी, जीवन-ज्योति बनने दो॥ अंतर में जब राम बसेंगे, द्वेष सभी अब ढलने दो।  राम नाम की चिंगारी है, भाव की हवा बस लगने दो॥ अंतरा २ शबरी जैसा सरल हृदय हो, प्रेम के बेर सजने दो।  केवट जैसी सेवा लेकर, चरणों में मन लगने दो॥ राम नहीं वैभव के भूखे, प्रेम की गंगा बहने दो।  र...

बोलो राम बोलो राम राम राम Lyrics भजन- एक भावपूर्ण राम भजन on high beats - Ram Bhajan

 बोलो राम बोलो राम राम राम 🙏 जय श्री राम 🙏 'कागज़ के पत्ते – रिश्तों के फूल' की इस प्रस्तुति में एक नया मौलिक भजन "बोलो रामu राम" प्रस्तुत है। यह भजन जीवन के हर पल में श्रीराम के नाम का स्मरण करने की प्रेरणा देता है। आशा है कि इसके भाव और शब्द आपके मन को शांति, आनंद और भक्ति से भर देंगे। 🚩 जय श्री राम 🚩 राम... राम... राम...राम... राम... राम... राम नाम से उजियारा... राम... राम... राम... जीवन का है सहारा... मुखड़ा जब सुबह उठो तो बोलो राम राम, हर साँस में घोलो राम राम। दिन हो चाहे या हो शाम, हर पल बोलो राम राम।। राम राम... राम राम... राम नाम , जीवन सहारा। हर पथ को कर दे उजियारा, बस बोलो राम... राम... राम।। अंतरा – १ जब धूप जले तो बोलो राम राम, जब छाँव मिले तो बोलो राम राम। जब गर्मी तन को तड़पाए, जब शीत लहर तन थर्राए, हर मौसम में एक ही नाम... बोलो राम राम... राम राम।। अंतरा – २ जब सुख आए तो बोलो राम राम, जब दुःख आए तो बोलो राम राम। हँसते-हँसते, रोते-रोते, चलते-चलते, सोते-सोते, हर धड़कन का यही पैगाम... बोलो राम राम... राम राम।। बोलो राम राम... राम राम... हर साँस में ...

52 बरस – मैं भी और तुम भी | विवाह, प्रेम और जीवन यात्रा पर हिंदी कविता; A husband to wife a love letter

  Visit: Kagaj Ke Patte – https://kagajkepatte.blogspot.com/   🌸 बावन बरस,मैं भी और तुम भी! 🌸 कुछ कविताएँ कल्पना से जन्म लेती हैं, और कुछ जीवन स्वयं लिखता है।  यह कविता उन्हीं अनगिनत पलों का संकलन है, जो दो लोगों ने साथ जीए संघर्ष, सपने, प्रेम, परिवार, बिछड़ाव, विश्वास और ईश्वर के आशीर्वाद के साथ।   52 बरस – मैं भी और तुम भी" केवल एक वैवाहिक जीवन की कहानी नहीं, बल्कि उस सफ़र का उत्सव है जहाँ दो लोग धीरे-धीरे एक-दूसरे का संसार बन जाते हैं।   आज हम बावन के हो गए ,   मैं भी , तुम भी ! पाँच दशक और दो बरस ,  मैं भी , तुम भी ! छब्बीस बरस 2000 से पहले ,  छब्बीस बरस 2000 के बाद , पलकों में जैसे सिमट गए , मैं भी , तुम भी। गाँव की पगडंडी से निकले , कस्बों की गलियों से गुजरे , शहरों की धड़कन तक पहुँचे , फिर राजधानी के सपने सँवरे । शहर बदलते रहे , नए रिश्ते बनते रहे , मंजिलें चाहे जितनी बदली ,   संग तेरे अरमान नए बुनते रहे। आज हम बावन के हो गए , मैं भी , तुम...