रिश्तों में प्रकट होते नवग्रह (एक वैदिक प्रेरणा गीत) मुखड़ा ग्रह केवल अम्बर में हों, केवल इतना सत्य नहीं, रिश्तों की हर डोर में भी, उनकी लीला कम नहीं। प्रेम, दया, सेवा, सम्मान, जीवन का सच्चा श्रृंगार, रिश्ते जब मुस्काएँ घर में, खिल उठे नवग्रह संसार॥ 🌞 सूर्य जब पिता से तकरार बढ़े, अहं मन में आकार चढ़े। कर्तव्य से जब मन हट जाए, मानो सूर्य संकेत बताए॥ पिता नहीं केवल एक शरीर, जीवन-पथ के प्रथम नज़ीर। उनके अनुभव का मान करो, आशीष का सम्मान करो। सत्य, श्रम, अनुशासन अपनाओ, अपने वचन सदा निभाओ॥ सूर्य तभी बलवान बने, जीवन में नव प्रभात तने। आत्मबल, यश, सम्मान महान, जग में ऊँचा हो पहचान॥ 🌙 चन्द्र जब माँ की आँखें नम हो जाएँ, मन में चिंता घर कर जाए। ममता का जो मान न जाने, मानो चन्द्र समझाने आए॥ माँ की सेवा सबसे न्यारी, उसमें छिपी जग की फुलवारी। करुणा, क्षमा हृदय में लाओ, कटु स्मृतियों को दूर भगाओ। शीतल वाणी, निर्मल मन, यही चन्द्र का सच्चा धन॥ चन्द्र तभी बलवान बने, मन में शांति का दीप जले। घर-आँगन आनंद से भरे,...