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कारवाँ

  कारवाँ गुजर रहा है, और गुजर जायेगा प्रेम मगर परीभाषा बनकर यहां पूजा जाएगा।।   भाभी मैया ओ भाभी माँ बांधो कोई ऐसी शमा रक्षा हो भ्रातृ प्रेम की, चौतरफा हो मनोरमा   सरहद की दीवारों से हर देश परेशान है निश्च्छल प्रेम ही हथियार एसा तोडे सरहद, जोड़े मंदिर धाम है    

लगन

लगी लगन तो लक्ष्य अलक्ष्य क्या, लगून शुभ महुरत का महत्व क्या। जब जुड़े जग जीव जीवात्म से, तो कष्ट क्या और कटन्क क्या। जब सच्ची राह पर ध्यान हो गहरा, तब शंका क्या, और संसार का बोझ क्या। उठे मन में विश्वास, हर बाधा अब दूर हो, अधिकार की राह पर, सपने हर पल साकार हो।

कोई बात नहीं

  क्षण क्षण जीवन का है अनमोल।  घडी घडी तू बातों को मत तोल ।।         जो निकल गया मुँह से, वो वापस तो नहीं जायेगा।   तू थोड़ा ठहर , ठण्ड रख , मत पीटे ढोल।।   क्षण क्षण जीवन …   ज्यादा उलझेगा तू , तो सुलझ नहीं पायेगा।   एक एक घूँट मार , चाहे कड़वा हो घोल।।   क्षण क्षण जीवन …         कर सकता है तो इतना कर, जो हर मन को भायेगा, जिव्ह्या को विराम दे, फिर थोड़ा मीठा बोल ।   क्षण क्षण जीवन …   "परवाह नहीं" एक मूल मंत्र है, "कोई बात नहीं " ये सफल यन्त्र है, अपनाले इसे, मतकर तू टालमटोल।   क्षण क्षण जीवन का है अनमोल।  घडी घडी तू बातों को मत तोल ।।     

अल्प विराम

  कल फिर नया सवेरा होगा, फिर नया जोश होगा मन का अंधियारा छट   जाएगा नई उमंगो का पेहरा होगा   फिर से नई कुछ मंजिल होगी राही के पथ में मुश्किल होगी फिर से अल्प विराम लेना तुम मुश्किलें कुछ आसां होंगी   मुश्किलों से ही शक्ति संचार होगा नव किरणों से दीदार होगा फिर से अल्प विराम लेना तुम हर शंका का समाधान होगा

यादो की कडी

  यादो की कडी बनाकर मन को मन से जोडलो जीवन है. छोटा सा भैया खुशियों की घडीयां बटोरलो   दुःखडा, चाहे पीछा ना छोडे हिम्मत ना कभी तुम हारना हर चढ़ाई पे ढलाई सबक यही तुम जानना ॥  

फैलेगा चंद्र जमी पे

  फैलेगा चंद्र जमी पे, मेहनत रंग लायेगी कामयाबी चरण चूमेगी, जीत आपकी कहलायेगी   हिम्मत ना हारना कभी, राह पर बढते जाना एक दिन है कठिन राहो को भी, सामने आपके झुक जाना   मौसम के भी कई रूप है, आँधी और तूफान भी,  बसन्त भी फिर आता है खुशीयाँ की वर्षात भी   दरीया भी टकराती है शूलों चौर चट्टानो से बढ़ती जाती है हमेशा, उध्येश्य के अरमानो से   जीत जाती है जूझ जूझ कर सागर में मिल जाती है उध्येश्य हुआ पूरा उसका, उदाहरण एक बन जाती हो

कविता क्यों ? | क्यों जन्म लेती है कविता? एक भावपूर्ण अभिव्यक्ति

भावनाओं के भंवर में, जब फँसा हो कोई, 'और' मौसम भी बेअसर होता है ।   सूझता नही, कुछ भी बस, नये शब्दों से सरोकार उसका होता है I   दो लाईन गर लिख भी दी कुछ और नहीं,   कविता का रूप ही होता है I