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Showing posts from 2022

हमारे प्यारे बाऊजी

  शशि उमा और चंद्र रमा, जब   चरों भाई मिल जाये I मन   ही   मन बाउजी, को फुले   ना   समायें   II हमरे   प्यारे   बाउजी, सबसे   न्यारे बाउजी I हमारे   अच्छे    बाउजी, सबसे   सच्चे   बाउजी II   समय बदला तो वो भी बदले, समय के साथ जाएँ I आधुनिक ज़माने से भी, सामंजस्य बिठायें II हमारे   प्यारे   बाऊजी ........   बहुओं   को   भी   बेटी   माना, पर्दा   प्रथा   हटाई I मात्र रूप सँजोकरके, प्रीत   की    रीत   जगाई II हमारे प्यारे   बाऊजी ........   उतर दक्षिण   पूरब   पश्चिम, चार   दिशा   चार भाई I चहुँ   दिशा में फैली है, इस बगिया की परछाई II हमारे   प्यारे   बाऊजी ........   कृष्णा सरोज औ उषा भी, और भुआजी आजायें इस घर की खुशहाली में, चार चाँद लग जाए II हमारे   प्यारे   बाऊजी ........   पूर्व जन्म के शुभ कर्मों से, ये आशीष है पाया I   धन्य धन...

खत मिला जब तेरा

खत मिला जब तेरा "सजनी",  लिखने का मन हो गया खुली आँखो ने देखा सपना,    मन कही मेरा खो गया   मन करता है, सब कुछ लिख दूँ लिख दूँ आहट - करवट - लिख दूँ पल पल की बेचैनी लिख दूँ लिख दूँ चाहत, तरसट लिख दूँ जब मैने पढ़ा तेरा प्रेम रागना, अखियों से झरना बह गया खुली आँखो ने देखा सपना,  मन कही मेरा खो गया   खत मिला जब तेरा "सजनी", लिखने का मन हो गया कैसे कटेंगी रातें “और” कैसे बीतें दिन, तेरे खयालो में सजनी, काटे दिन गिन गिन खत मिलते ही तेरा सजनी, होश हमारा खो गया ओ सजनी तेरे प्यार में पागल, मैं दीवाना हो गया खत मिला …   कब आई तू दिल में मेरे,  कब धड़कन में समा गयी दिन दहाड़े दिल में घुस कर,  चैन चुराकर ले गयी रपट लिखाउ किस थाने में,  दिल चोरी रे हो गया ओ सजनी तेरे प्यार में पागल मैं दीवाना हो गया खत मिला …

शुभ आशीष

  मेरे सीधे साज, ओ मेरे मीठे संगीत मेरी सरगम, मेरी रागिनी ऐ मेरे सुरीले गीत   मेरे जतन, ओ मेरी साधना मेरी कोशिश, मेरी भावना ए मेरी निश्छल जीत   मेरी खुशबू ओ मेरे फूल मेरी नींव, 'मेरे मूल ए मेरी सर्वग रीत   मेरी लगन, ओ मेरी शमा मेरे भविष्य, मेरे वर्तमा: ए सुन्दर स्वप्निल अतीत   मेरे मन की ज्योती, ए मेरे मन के मीत मेरी चीनू ओ मेरी मीनू ए मेरे परम् प्रीत   खुश रखेंगे सदा, मेरे ईश्वर मेरे ईश तीक्ष्ण तरंगें निकल रही है बन कर शुभ आशीष 

मनवीणा

    दीवाली पे तूने जो दीप जलाया है खुश होकर खुद लक्ष्मीजीने 'तेरा दर सजाया है।   सुन्दर साँवली सलोनी सी. ‘शालीन’ सजल सम कोयल सी, उस ‘आलोकित’ दीप की ज्योती ने, उस मादक मन की मोहनी ने, हर मन महकाया है खुश होकर   …   अरे, राजयोग लेकर आयी वो खुद बनेगी शहनाई घुटमन दोडेगी आँगन में किलकारी गूंजेंगी दामन में अब खुशीयों की छाया है खुश होकर …   दादी की बनेगी वो ताई अपनी मम्मी की परछाई पुलकित मन की मनवीणा सूंदर हाथों वो हिना हर सुर समाया है खुश होकर …

पैगाम

  भ्रम था अभी तक हमें    “कि" दिल हमारा हमारे पास है महसूस हुआ आज        “कि" हिया कोई और लिये बैठा है   पेबंद किताब की तरह, हम तो बिके चले जारहे थे मालूम हुआ आज,      “कि” पहले से कोई और पढ़े बैठा है   बेलगाम घोड़े की तरह, बढे जा रहे थे जिन्दगी की राहों में ठिठरे हुए लमहो ने बताया “कि” लगाम कोई और थामे बैठा है   मशगुल थे हम तो नौकरी पेशे के प्रश्न ऐ जवाबो में अहसास हुआ आज “कि” प्यार का ये अहसास, कोई पैगाम लिये बैठा है

तुम हो

  हुस्न की परी हो तुम दिल की मलिका हो तुम चाहत की कड़ी तुम हो, तुम हो, तुम हो   मेरे ख्वाबो की रानी, महकती जवानी मेरे जीवन की कहानी तुम हो, तुम हो, तुम हो   गर्मी की जलन, जाड़े की तड़प फूलो की महक, पंछी की चहक सावन की बरखा तुम हो तुम हो तुम हो   उमाकान्त भवानी रूप सयानी , बंक बावरी और थोड़ी रूमानी तुम हो तुम हो तुम हो

तेरी मुस्कान

  तेरी मुस्कान अब, इस दिल में समा गयी अँधेरी रातो में, रोशनी छा गयी   पहली मुलाकात में, शर्माए थे हुज़ूर शर्मा के थोड़ा मुस्काये थे जुरूर वो मुस्कराहट क्या गुल खिला गयी अँधेरी रातो ….   मिलके अभी दूर हुए, फिर भी मचलता है जिया कैसे कहूं, क्या मैं कहूं, जैसे बिन बाती दिया वो अगन सब, दीप जला गयी   अँधेरी रातो …

गीत : चांदनी चुरा कर

  दो दिन   दो दिन मिलकर हाए 'सनम" दीवाना कर गये पानी दिखा कर वो, प्यासा ही छोड गये   कहते थे चांद हो तुम, सितारे भी ना रहे, चाँदनी चुराकर 'सनम’, अंधेरा.. अंधेरा कर गये दो दिन मिलकर …   वादे किये हजार हाए, वो वादे कहाँ गये, चले थे मिलकर साथ, अकेला छोड गये। दो दिन मिलकर …   कैसे थे पहले "और अब", क्या से क्या हो गये जीने की चाह है, 'मगर' जीने लायक ना रहे   लिखा नहीं था कभी, आज लिखते चले गये " उमा " गजल सुनकर 'सनम', वापस तो आ गये।   बिछड़े हुए दो प्रेमी आज एक होगये चादनी जो चांद को मिली, सितारे खिल गये

प्यार की डगर

चांद का नगर,  चांदनी का पहर लोग सोते हुए,  जाग जाते है।                                                          जिन्दगी का सफर,  प्यार की हो डगर गम यूँ ही दूर,  भाग जाते है I लोग सोते हुए,  जाग जाते है। चांद का नगर,  चांदनी का पहर लोग सोते हुए,  जाग जाते है।   ढूँढो ढूंढो जरा,  स्वर्ग की वो धरा, जहाँ दुःख,  नजर नही आते है। लोग सोते हुए,  जाग जाते है। चांद का नगर,  चांदनी का पहर लोग सोते हुए,  जाग जाते है।   दर्द को समझें दर्द,  दुःखों में दें मदद बाते करते अजब,  फिर देखो गजब दुश्मन भी दोस्त बन जाते है। लोग सोते हुए,  जाग जाते है। चांद का नगर,  चांदनी का पहर लोग सोते हुए,  जाग जाते है।

आंसूऔ में भी आस

  मेरी कविता थोड़ी, अधूरी सी होती है  पर लिखने की चाह, भावों में भरी सी होती है  । । मेरी कविता थोड़ी, .......    ना मुझे इंग्लिश पूरी आती और ना हिन्दी  ।   शब्दों की कुछ, कमी सी होती है  । मेरी कविता थोड़ी, अधूरी सी होती है    कुछ लोग पसंद करते है, कुछ मुह  बना  लेते है  । मेरी कविता में, कुछ कमी सी होती है  । । मेरी कविता थोड़ी, अधूरी सी होती है ।   माँ भी आयी थी, मेरी जिंदगी में, बस अपनी अहमियत, दिखाने को  । बची सारी उम्र, छोड़ गई मुझे रुलाने को  । । ममता की छाँव की, कुछ कमी सी होती है  । मेरी कविता थोड़ी, अधूरी सी होती है ।। बचपन से लेकर, बड़े होने तक कुछ तो, अधूरेपन का एहसास है  । फिर भी  जिंदगी में, कुछ तो खास है  । ।   जी हाँ  आंसूऔ में भी,   आस होती है    ।   मेरी कविता कुछ अधूरी सी होती है  । ।

रिश्तों के फूल

  बड़ी अजीब सी बात है खिलाने चले रिश्तों के फूल ढूंढ़ने में लगे उन्हीं की भूल   गुलाब की खुशबु लेनी है कांटों को गिनना छोड़लो फूल तोड़ने से पहिले प्यार से सींच लो   जीवन में खुशबु ही खुशबु है बस खुशबु बिखेरना सीख लो तोड़ने से पहिले बस जड़ों को सींचना सीख लो

खुदकश

    आदमी पास होकर भी दूर हो जाता है I दूर रहकर पास आने के लिए तरसता है I   अजीब सी दुनिया है तेरी भगवान् “खुदकश” खुद को ही खुद से दूर करता है I