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खींची मैंने रेखा पे रेखा

 पूजा बत्ती करली मैंने  मंदिर भोग लगा आया, लोगों को मन्तर आता नहीं मैंने तो मन्तर भी गाया  कर दान रुपे दो मंदिर में, मैं दानवीर भी कहलाया। दोष दिखें  औरों में मुझको , मेरी तो निर्दोषी काया ,  नही क्रोध मुझ में थोड़ा भी , पर औरों पे गुस्सा आया , अहम नही मुझ में बोलो मैंने तो मैं को ही पाया ज्ञान बहुत मुझ में मगर औरो में भूसा देखा अहम के जंजाल में फंस, खींची मैंने रेखा पे रेखा

पक्का धागा

पक्का धागा बहन चाहे जितनी भी दूर हो,  भाई को नहीं भूलती । भाई के मन में भी बहन हमेशा,  हिलोरे लिये झूलती । बंधन है यह पक्के धागे का, बहन बेटी मन के रागों का,  कलाई अपने आप उठकर  अपने माथे को चूमती ॥ बहन और बेटी को शत-शत नमन हैप्पी रक्षा बंधन 

रिश्ते ही जीवन का संगीत

 कुछ लोग कड़वी यादों को सीने में छुपाते हैं, बस रिश्तों को तोड़ने के बहाने बनाते हैं। कुछ लोग मीठी बातों से दिल को सजाते हैं, हर लम्हे को रिश्तों का पर्व बनाते हैं। रिश्ते ही तो जीवन का है संगीत  इन्हीं से हर धड़कन में है प्रीत। जो रिश्तों को शतरंज की बिसात मान लेते हैं, विश्वास को मोहरे की तरह चला जाते हैं, शतरंज में जीता जा सकता है, पर रिश्तों में अक्सर  दिल की बाज़ी हार जाते हैं।

आनंद

 तुम खुश हो अपनी किसी खुशी में,  ये साधारण सी बात  है आनंद की बात यह है कि आपकी खुशी में दूसरे लोग फूले ना समाएँ 

खुद से दूर

आदमी पास होकर भी, दूर हो जाता है दूर हो , पास होने के लिए तरसता है अजीब सी दुनिया है तेरी भगवन खुद ही खुद से दूर हो जाता है

बात बात पे

मैं तेरी बात पे, तू मेरी बात पे , और , बात एक ही है मैं कुछ कह रहा था, तू कुछ सुन रहा था, तू कुछ कह रहा था, मैं कुछ समझ रहा था। और फिर... हम दोनों इस मुगालते में थे, कि हम एक-दूसरे से लड़ रहे हैं, जबकि लड़ाई बस अहं से थी — बात तो अब भी वहीं की वहीं थी।

चार भाई तीन बहन

चार भाई, तीन बहन चारों दिश सत्संग  प्रेम पताका  लहरा रही  चौतरफा बरसे रंग  हे प्रभु ! बहती रहे जलधार  ना हो कोई अंत  खुशियां अनगिनत  उमड़े आनंद अनंत 10.03.2020

खजाना

जहां खोजने चला तू ख़ज़ाने को, घर छोड़ आया वह ख़ज़ाना तो ज़माने को। जिस ममता ने तुझको चलना सिखाया, तू छोड़ आया वही आँचल के तराने को। जो आंखें बरसों तेरी राह तकती रहीं, तू अकेला छोड़ आया उनके अफ़साने को। सांसों में उनकी अब तेरा ही नाम है, पर तू भुला बैठा उनकी उस दीवानेपन को। दौलत की चमक में वो सुकून न मिलेगा, जो छोड़ आया तू अपने पुराने ठिकाने को। 02.05.2020

कवि नवाब केसर

विरासते अलीगढ में जब खिला वो  गुलाब  हर शख्स ढूंढ रहा जटिल प्रश्नों के जवाब हृदय सरल हो तो जटिलता कहां  गौर से देखो जवाबों में हमारे नवाब भावों से भरी हो जिंदगी  तो हर दिल में बजे रवाब कवि हो या उसकी कविता  कहीं ना कहीं है हमारे केसर नवाब 01.07.2020

पिता की नम ऑखें

क्या कहती है यह आंखें  क्या बोले यह मन  कुछ दिनों का पहरेदार हूं भाइयों  कर लो प्रेम मिलन । याद रखेगी दुनिया,  गर याद रखोगे तुम  मन से ही मन को समझ लो ,  शब्दों का करो दमन  जीवन है छोटा सा भैया, खुशियों की घड़ियां बटोर लो  इस कड़वी दुनिया में,  कुछ मीठे पल बिखर लो फोन करोगे मुझको तो, आशीष ही मिलेगा  लेकर कुछ जाना नही , सब तुम्हें ही मिलेगा  समझ समझ में कुछ नहीं बिना समझे ही दिल लगा ले  कुछ क्षण मुझको दे दो  थोड़ा मुझ में मन लगा ले  21.12.2017

सवाल और जवाब

ज़िंदगी में सवाल भी देखे, और जवाब भी देखे।  ऐ मशक्कत भरी ज़िंदगी, जवाबों की जगह,  इल्ज़ामों के हमले हज़ार देखे।  सुना था ज़िंदगी कभी, नासूर बन जाती है,  हक़ीक़त में, बदलते सवाल और जवाब भी देखे।  अब तो हर सवाल पर मुस्कुरा देते हैं,  क्योंकि बदलते वक़्त के साथ जवाब बदलते देखे।

धुन

आज भी जिंदगी  तुम्हारे हाथ में है  कल भी थी और कल भी तुम्हारे हाथ में है परिभाषा तुम दोगे  जिंदगी तो को तो, अपनी धुन में चलना है

कश्मकश

  जिंदगी दो पडावों के  कश्मकश में  गुजराती चली गई   एक अभी उम्र नहीं और  दूसरी अब उम्र नहीं 26.12.2017 उमाकांत

हमारे प्यारे बाऊजी

  शशि उमा और चंद्र रमा, जब   चरों भाई मिल जाये । मन   ही   मन बाउजी, को फुले   ना   समायें  ॥ हमरे   प्यारे   बाउजी, सबसे   न्यारे बाउजी । हमारे   अच्छे    बाउजी, सबसे   सच्चे   बाउजी ॥  समय बदला तो वो भी बदले, समय के साथ जाएँ । आधुनिक ज़माने से भी, सामंजस्य बिठायें ॥ हमारे   प्यारे   बाऊजी ........ बहुओं   को   भी   बेटी   माना, पर्दा   प्रथा   हटाई । मात्र रूप सँजोकरके, प्रीत   की    रीत   जगाई ॥ हमारे प्यारे   बाऊजी ........ उतर दक्षिण   पूरब   पश्चिम, चार   दिशा   चार भाई । चहुँ   दिशा में फैली है, इस बगिया की परछाई ॥ हमारे   प्यारे   बाऊजी ........ कृष्णा सरोज औ उषा भी, और भुआजी आजायें इस घर की खुशहाली में, चार चाँद लग जाए ॥ हमारे   प्यारे   बाऊजी ........ पूर्व जन्म के शुभ कर्मों से, ये आशीष है पाया । धन्य धन्य ओ बाउजी,      धन्य आपकी   माया...

खत मिला जब तेरा

खत मिला जब तेरा "सजनी",  लिखने का मन हो गया खुली आँखो ने देखा सपना,    मन कही मेरा खो गया   मन करता है, सब कुछ लिख दूँ लिख दूँ आहट - करवट - लिख दूँ पल पल की बेचैनी लिख दूँ लिख दूँ चाहत, तरसट लिख दूँ जब मैने पढ़ा तेरा प्रेम रागना, अखियों से झरना बह गया खुली आँखो ने देखा सपना,  मन कही मेरा खो गया   खत मिला जब तेरा "सजनी", लिखने का मन हो गया कैसे कटेंगी रातें “और” कैसे बीतें दिन, तेरे खयालो में सजनी, काटे दिन गिन गिन खत मिलते ही तेरा सजनी, होश हमारा खो गया ओ सजनी तेरे प्यार में पागल, मैं दीवाना हो गया खत मिला …   कब आई तू दिल में मेरे,  कब धड़कन में समा गयी दिन दहाड़े दिल में घुस कर,  चैन चुराकर ले गयी रपट लिखाउ किस थाने में,  दिल चोरी रे हो गया ओ सजनी तेरे प्यार में पागल मैं दीवाना हो गया खत मिला …

शुभ आशीष

  मेरे सीधे साज, ओ मेरे मीठे संगीत मेरी सरगम, मेरी रागिनी ऐ मेरे सुरीले गीत   मेरे जतन, ओ मेरी साधना मेरी कोशिश, मेरी भावना ए मेरी निश्छल जीत   मेरी खुशबू ओ मेरे फूल मेरी नींव, 'मेरे मूल ए मेरी सर्वग रीत   मेरी लगन, ओ मेरी शमा मेरे भविष्य, मेरे वर्तमा: ए सुन्दर स्वप्निल अतीत   मेरे मन की ज्योती, ए मेरे मन के मीत मेरी चीनू ओ मेरी मीनू ए मेरे परम् प्रीत   खुश रखेंगे सदा, मेरे ईश्वर मेरे ईश तीक्ष्ण तरंगें निकल रही है बन कर शुभ आशीष 

मनवीणा

    दीवाली पे तूने जो दीप जलाया है खुश होकर खुद लक्ष्मीजीने 'तेरा दर सजाया है।   सुन्दर साँवली सलोनी सी. ‘शालीन’ सजल सम कोयल सी, उस ‘आलोकित’ दीप की ज्योती ने, उस मादक मन की मोहनी ने, हर मन महकाया है खुश होकर   …   अरे, राजयोग लेकर आयी वो खुद बनेगी शहनाई घुटमन दोडेगी आँगन में किलकारी गूंजेंगी दामन में अब खुशीयों की छाया है खुश होकर …   दादी की बनेगी वो ताई अपनी मम्मी की परछाई पुलकित मन की मनवीणा सूंदर हाथों वो हिना हर सुर समाया है खुश होकर …

पैगाम

  भ्रम था अभी तक हमें    “कि" दिल हमारा हमारे पास है महसूस हुआ आज        “कि" हिया कोई और लिये बैठा है   पेबंद किताब की तरह, हम तो बिके चले जारहे थे मालूम हुआ आज,      “कि” पहले से कोई और पढ़े बैठा है   बेलगाम घोड़े की तरह, बढे जा रहे थे जिन्दगी की राहों में ठिठरे हुए लमहो ने बताया “कि” लगाम कोई और थामे बैठा है   मशगुल थे हम तो नौकरी पेशे के प्रश्न ऐ जवाबो में अहसास हुआ आज “कि” प्यार का ये अहसास, कोई पैगाम लिये बैठा है

तुम हो

  हुस्न की परी हो तुम दिल की मलिका हो तुम चाहत की कड़ी तुम हो, तुम हो, तुम हो   मेरे ख्वाबो की रानी, महकती जवानी मेरे जीवन की कहानी तुम हो, तुम हो, तुम हो   गर्मी की जलन, जाड़े की तड़प फूलो की महक, पंछी की चहक सावन की बरखा तुम हो तुम हो तुम हो   उमाकान्त भवानी रूप सयानी , बंक बावरी और थोड़ी रूमानी तुम हो तुम हो तुम हो

तेरी मुस्कान

  तेरी मुस्कान अब, इस दिल में समा गयी अँधेरी रातो में, रोशनी छा गयी   पहली मुलाकात में, शर्माए थे हुज़ूर शर्मा के थोड़ा मुस्काये थे जुरूर वो मुस्कराहट क्या गुल खिला गयी अँधेरी रातो ….   मिलके अभी दूर हुए, फिर भी मचलता है जिया कैसे कहूं, क्या मैं कहूं, जैसे बिन बाती दिया वो अगन सब, दीप जला गयी   अँधेरी रातो …

गीत : चांदनी चुरा कर

  दो दिन   दो दिन मिलकर हाए 'सनम" दीवाना कर गये पानी दिखा कर वो, प्यासा ही छोड गये   कहते थे चांद हो तुम, सितारे भी ना रहे, चाँदनी चुराकर 'सनम’, अंधेरा.. अंधेरा कर गये दो दिन मिलकर …   वादे किये हजार हाए, वो वादे कहाँ गये, चले थे मिलकर साथ, अकेला छोड गये। दो दिन मिलकर …   कैसे थे पहले "और अब", क्या से क्या हो गये जीने की चाह है, 'मगर' जीने लायक ना रहे   लिखा नहीं था कभी, आज लिखते चले गये " उमा " गजल सुनकर 'सनम', वापस तो आ गये।   बिछड़े हुए दो प्रेमी आज एक होगये चादनी जो चांद को मिली, सितारे खिल गये

प्यार की डगर

चांद का नगर,  चांदनी का पहर लोग सोते हुए,  जाग जाते है।                                                          जिन्दगी का सफर,  प्यार की हो डगर गम यूँ ही दूर,  भाग जाते है I लोग सोते हुए,  जाग जाते है। चांद का नगर,  चांदनी का पहर लोग सोते हुए,  जाग जाते है।   ढूँढो ढूंढो जरा,  स्वर्ग की वो धरा, जहाँ दुःख,  नजर नही आते है। लोग सोते हुए,  जाग जाते है। चांद का नगर,  चांदनी का पहर लोग सोते हुए,  जाग जाते है।   दर्द को समझें दर्द,  दुःखों में दें मदद बाते करते अजब,  फिर देखो गजब दुश्मन भी दोस्त बन जाते है। लोग सोते हुए,  जाग जाते है। चांद का नगर,  चांदनी का पहर लोग सोते हुए,  जाग जाते है।

आंसूऔ में भी आस

  मेरी कविता थोड़ी, अधूरी सी होती है  पर लिखने की चाह, भावों में भरी सी होती है  । । मेरी कविता थोड़ी, .......    ना मुझे इंग्लिश पूरी आती और ना हिन्दी  ।   शब्दों की कुछ, कमी सी होती है  । मेरी कविता थोड़ी, अधूरी सी होती है    कुछ लोग पसंद करते है, कुछ मुह  बना  लेते है  । मेरी कविता में, कुछ कमी सी होती है  । । मेरी कविता थोड़ी, अधूरी सी होती है ।   माँ भी आयी थी, मेरी जिंदगी में, बस अपनी अहमियत, दिखाने को  । बची सारी उम्र, छोड़ गई मुझे रुलाने को  । । ममता की छाँव की, कुछ कमी सी होती है  । मेरी कविता थोड़ी, अधूरी सी होती है ।। बचपन से लेकर, बड़े होने तक कुछ तो, अधूरेपन का एहसास है  । फिर भी  जिंदगी में, कुछ तो खास है  । ।   जी हाँ  आंसूऔ में भी,   आस होती है    ।   मेरी कविता कुछ अधूरी सी होती है  । ।

रिश्तों के फूल

  बड़ी अजीब सी बात है खिलाने चले रिश्तों के फूल ढूंढ़ने में लगे उन्हीं की भूल   गुलाब की खुशबु लेनी है कांटों को गिनना छोड़लो फूल तोड़ने से पहिले प्यार से सींच लो   जीवन में खुशबु ही खुशबु है बस खुशबु बिखेरना सीख लो तोड़ने से पहिले बस जड़ों को सींचना सीख लो